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ABAP ने न्यायालय परिसर में मनाया समरसता दिवस

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-जिलाध्यक्ष चितरंजय पटेल ने संविधान के प्रस्तावना कराया वाचन…

दुनियां के रैन बसेरे में.. पता नही कितने दिन रहना है, जीत ले सबके दिलों को.. बस यही इंसानियत का कहना है… इन पंक्तियों के साथ अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के जिला अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने न्यायालय परिसर, सक्ती में ABAP द्वारा आयोजित समरसता दिवस पर कहा कि भारतीय संविधान में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और संविधान ही भारतीयों का सर्वश्रेष्ठ धर्म ग्रंथ है जिसका पठन और पालन हम सब भारतीयों का कर्तव्य है आज अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने उक्त उद्गार के साथ उपस्थित अधिवक्ताओं एवं हाजिर लोगों को संविधान के मूल प्रस्तावना का वाचन कराया। उन्होंने भारत रत्न डा भीमराव अंबेडकर की जन्म जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि हर भारतीय के लिए निजी धर्म ग्रंथों से भी बढ़कर भारतीय संविधान है जिसे आत्मसात कर उसका पालन सुनिश्चित करें तो निश्चित रूप से हमारा देश सशक्त और समृद्धशाली बनेगा।

इन पलों में अधिवक्ता परिषद शक्ति जिलाध्यक्ष चितरंजय पटेल, जिला महामंत्री विजय चंद्रा, शक्ति तहसील अध्यक्ष नरेंद्र पटेल, बाराद्वार तहसील अध्यक्ष मालिक राम यादव,अधिवक्ता संघ सचिव सुरीत चंद्रा, डिप्टी चीफ लीगल काउंसिल धर्मेंद्र सोन, असिस्टेंट लीगल काउंसिल त्रिभुवन जांगड़े आदि अधिवक्ताओं के साथ आमजन उपस्थित रहे।लोगों ने बाबा साहब स्मरण करते हुए कहा कि अंबेडकर ने भारतीय संविधान में धर्म_जाति विभेद से परे आम जन को समानता से जीने का अधिकार सुनिश्चित किया है परिणाम स्वरूप आज सर्व समाज सामाजिक एकता और भाईचारा के साथ बाबा साहब की जन्म जयंती को समरसता दिवस के रूप में मना रहा है।

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