रिपोर्ट-खिलेश साहू
धमतरी: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल स्टोर्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कई मेडिकल दुकानों में कम पढ़े-लिखे, यहां तक कि अंगूठा छाप या केवल 8वीं पास कर्मचारी दवा वितरण का काम कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जब मरीज या उनके परिजन दवा लेने मेडिकल स्टोर पहुंचते हैं, तो कई जगहों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की बजाय अनुभवहीन कर्मचारी दवाइयां देते हैं। कई मामलों में ये कर्मचारी दवाइयों को केवल पैकेट या तस्वीर देखकर पहचानते हैं, जिससे गलत दवा दिए जाने की आशंका बनी रहती है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि उनके साथ भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां गलत दवा दिए जाने की स्थिति बनी। शिकायत करने पर संबंधित मेडिकल संचालक ने माफी मांग ली, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि यदि इसी प्रकार की गलती किसी ग्रामीण या कम जागरूक व्यक्ति के साथ हो जाए और कोई गंभीर घटना घटित हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—डॉक्टर की या मेडिकल स्टोर संचालक की?
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि बिना योग्य फार्मासिस्ट के दवा वितरण नियमों के खिलाफ है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल यह उठता है कि क्या शासन-प्रशासन ऐसे मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई करेगा, जो नियमों की अनदेखी कर अयोग्य कर्मचारियों से दवाइयां वितरित करवा रहे हैं। जिलेवासियों ने इस मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।








