बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
देश की उभरती हुई युवा पर्वतारोही ग्रिहिता विचारे ने एक बार फिर अपने साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से नया इतिहास रच दिया है। मुंबई, महाराष्ट्र की रहने वाली मात्र 11 वर्षीय ग्रिहिता ने छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा पीक पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर प्रदेश सहित पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इस रोमांचक अभियान में उनके पिता सचिन विचारे भी उनके साथ मौजूद रहे और हर कदम पर उनका उत्साहवर्धन करते रहे।
ग्रिहिता का यह अभियान केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का भी माध्यम बना। वे अपने हर अभियान के जरिए “बेटी पढ़ाओ–बेटी बचाओ” का संदेश जन-जन तक पहुंचा रही हैं। इतनी कम उम्र में उनकी उपलब्धियां देशभर के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

कम उम्र में हासिल की बड़ी उपलब्धियां
ग्रिहिता ने बचपन से ही साहसिक खेलों और पर्वतारोहण में विशेष रुचि दिखाई। कठिन परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों का सामना करते हुए उन्होंने कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अभियानों में सफलता हासिल की है। इससे पहले वे विश्व प्रसिद्ध एवरेस्ट बेस कैंप की कठिन ट्रैकिंग पूरी कर चुकी हैं। इसके अलावा अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो तथा मलेशिया की प्रसिद्ध माउंट किनाबालु पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुकी हैं।
इतनी कम उम्र में लगातार कठिन पर्वतीय अभियानों को पूरा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रिहिता जैसी प्रतिभाएं आने वाले समय में भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचा करेंगी।
गौरलाटा अभियान बना आकर्षण का केंद्र
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्थित गौरलाटा पीक प्राकृतिक सौंदर्य और कठिन पहाड़ी रास्तों के लिए जानी जाती है। यहां तक पहुंचना आसान नहीं माना जाता, लेकिन ग्रिहिता ने पूरे आत्मविश्वास और साहस के साथ इस चुनौती को स्वीकार कर सफलता हासिल की।
अभियान के दौरान स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों और पर्वतारोहण प्रेमियों ने ग्रिहिता का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साहस की जमकर सराहना की।
संतोष इंजीनियर ने किया सम्मान
गौरलाटा अभियान के दौरान सरपंच संघ अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने ग्रिहिता विचारे का आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा—
“ऐसी प्रतिभाएं देश और समाज का गौरव होती हैं। ग्रिहिता जैसी बेटियां युवाओं को साहस, अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रकृति प्रेम की प्रेरणा देती हैं। इनके अभियान न केवल बेटियों को आगे बढ़ने का संदेश देते हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्वतीय क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग मिले, तो वे छोटी उम्र में भी बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।
क्षेत्रवासियों ने दी शुभकामनाएं
ग्रिहिता की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, युवाओं, पर्वतारोहण प्रेमियों एवं क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ग्रिहिता विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भी तिरंगा लहराकर देश का नाम रोशन करेंगी।
ग्रिहिता की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उनकी यह उपलब्धि न केवल बेटियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है।








