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आयुर्वेद के अनुसार आहार से जुड़े 5 जरूरी नियम: स्वस्थ शरीर और मजबूत पाचन के लिए अपनाएं ये आदतें

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आयुर्वेद में हर चीज के नियम बताए गए हैं। खाना खाने से लेकर पानी पीने तक के नियम हैं। खाने के नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए तो शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों को दूर रखने में मदद मिल सकती है। आप क्या खाते हैं और कैसे खाते हैं इससे आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इसलिए अगर आपको रोगों से दूर रहना है तो खाने और पानी पीने से जुड़े इन 5 नियमों का पालन जरूर करें। इससे आपकी काफी समस्याएं दूर हो जाएंगी। आपका शरीर स्वस्थ रहेगा और पाचन मजबूत होगा।

खाने और पीने से जुड़े नियम

मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाएं- सबसे पहला नियम है कि आप जो रोटी खा रहे हैं वो किस आटे की बनी है। आपको सिर्फ गेहूं के आटे से बनी रोटी नहीं खानी चाहिए। 10 किलो आटे में 1 किलो सोयाबीन, 1 किलो जौ और 1 किलो बेसन डाल दो।

आटे में मिलाएं पत्ते- अब दूसरा नियम कि जब भी आप आटे से रोटी बनाएं तो आटा गूंथने में पत्ते जरूर मिलाएं। आप कोई भी पत्ते जैसे पालक, मेथी, बथुआ, सहजन का इस्तेमाल कर सकते हैं। जितना आटा गूंथ रहे हैं उसा 25 प्रतिशत कोई भी पत्ते बारीक काटकर डाल दें। इससे रोटी बनाकर खाएं।

खाने के बाद पानी- तीसरा नियम पानी का है, कि जब भी खाना खाओ तो खाने के साथ पानी कभी मत पीओ। आप खाने से आधा घंटा पहले या 40 मिनट बाद पानी पी सकते हैं। हां, खाने के बीच में पानी पी सकते हैं एक या दो घूंट अगर बहुत प्यास लगे या तीखा लगे। अगर खाना खाने के तुरंत बाद पीना पीते हैं तो इससे अग्नि कम हो जाती है।

भूख प्यास लगने पर ही खाएं- चौथा नियम है कि खाना भूख लगने पर ही खाना चाहिए। जब भूख नहीं लगी तो खाना नहीं खाना। प्यास नहीं लगी तो पानी नहीं पीना। इसके अलावा खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक या चाय और काफी नहीं पीनी चाहिए।

सूर्य अस्त के बाद खाना न खाएं- पांचवां और सबसे अहम नियम है कि आपको सूरज डूबने के बाद खाना नहीं खाना है। हफ्ते में एक दिन का उपवास जरूर करें। छह दिन खाओ, एक दिन मत खाओ। इससे सारी बीमारियां खुद से ठीक हो जाएंगी।

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