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आपातकाल की जननी कांग्रेस राष्ट्रपति शासन की मांग कर लोकतंत्र का उपहास उड़ा रही है — भारत सिंह सिसोदिया

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-आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र बचाने का ढोंग कर रही है, जबकि जनता उसके शासनकाल के घोटालों और कुशासन को भूली नहीं है।”

अंबिकापुर।
भारतीय जनता पार्टी सरगुजा के जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया ने जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा द्वारा महामहिम राज्यपाल के नाम सौंपे गए ज्ञापन में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग को लोकतंत्र, संविधान और प्रदेश की जनता के जनादेश का घोर अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश पर 1975 में आपातकाल थोपकर लोकतंत्र का गला घोंटा, प्रेस की स्वतंत्रता को कुचला, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला और संविधान की मूल भावना को आहत किया, वही कांग्रेस आज लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की दुहाई देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

श्री सिसोदिया ने कहा कि सीतापुर की एक घटना को आधार बनाकर पूरे प्रदेश में संवैधानिक तंत्र विफल होने का आरोप लगाना पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। उक्त मामले में कानून के अनुसार अपराध दर्ज किया गया है तथा जांच और विधिसम्मत कार्यवाही जारी है। किसी एक घटना को बहाना बनाकर राष्ट्रपति शासन की मांग करना कांग्रेस की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अविश्वास और राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास देश और प्रदेश को अस्थिर करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों से भरा पड़ा है। केंद्र में रही कांग्रेस और इसके गठबंधन सरकारों के कार्यकाल को देखें, तो केंद्र में उनके शासन के दौरान 80 से अधिक बार अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।

देश ने 1975 का आपातकाल देखा, 1984 के सिख विरोधी दंगों की त्रासदी देखी, बोफोर्स घोटाला, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला और कोयला आवंटन घोटाले जैसे अनेक प्रकरण देखे, जिन्होंने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए।

श्री सिसोदिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये के कथित शराब घोटाले, कोयला लेवी वसूली प्रकरण, महादेव ऑनलाइन सट्टा एप प्रकरण, पीएससी भर्ती अनियमितताओं, डीएमएफ मद के उपयोग को लेकर उठे प्रश्नों तथा विभिन्न विभागों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाया। इन मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की गई तथा कई मामलों में तत्कालीन शासन से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों, अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम सार्वजनिक चर्चा और जांच का विषय बने। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री कवासी लखमा सहित कांग्रेस शासन से जुड़े अनेक व्यक्तियों के नाम विभिन्न जांचों और आरोपों के संदर्भ में सामने आए, जिनकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की गई अथवा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उस समय संविधान संकट दिखाई नहीं दिया, जब प्रदेश में भ्रष्टाचार, संरक्षणवाद और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लग रहे थे। आज जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पारदर्शिता, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है, तब कांग्रेस जनता के हितों के बजाय राजनीतिक षड्यंत्र और भ्रम फैलाने में लगी हुई है।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल सहित अन्य प्रशासनिक विषयों का समाधान शासन ने संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित किया है। कांग्रेस ऐसे विषयों को राजनीतिक रंग देकर जनता के बीच असंतोष और भ्रम का वातावरण निर्मित करना चाहती है। कांग्रेस को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए जनता द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करना चाहिए।

श्री सिसोदिया ने कहा कि कांग्रेस प्रारंभ से ही देश में आपातकाल जैसी परिस्थितियां उत्पन्न कर सत्ता प्राप्त करने और राजनीतिक लाभ लेने की मानसिकता से प्रेरित रही है। आज राष्ट्रपति शासन की मांग उसी मानसिकता का विस्तार है। छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र को भलीभांति समझती है और विकास, सुशासन तथा जनहित के लिए कार्यरत भारतीय जनता पार्टी की सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

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