कुसमी बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
30 दिन बीते, नहीं मिली जानकारी, अब प्रथम अपीलीय अधिकारी, ने दिया मुफ्त में रजिस्टर्ड डाक से जानकारी भेजने का कड़ा आदेश
बलरामपुर-रामानुजगंज।सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता का दावा करने वाले विभागों में सूचना का अधिकार कानून को किस तरह ठेंगे पर रखा जाता है, इसका एक ताज़ा और गंभीर मामला सामने आया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत एकीकृत बाल विकास परियोजना बलरामपुर द्वारा एक आरटीआई आवेदन पर तय समय सीमा में जानकारी न देना भारी पड़ गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम अपीलीय अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है।
गांधीनगर, अंबिकापुर सरगुजा की निवासी मीना देवी मानिकपुरी ने जनवरी 2025 में तातापानी में आयोजित हुए 300 जोड़ों के सामूहिक विवाह के खर्चों को लेकर विभाग से हिसाब मांगा था।

इस सामूहिक विवाह में जनता की गाढ़ी कमाई का कितना पैसा लगा, इसे जानने के लिए आवेदिका ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं जिनमें
वर-वधू को दी गई सामग्रियों के बिल-वाउचर।
300 जोड़ों पर खर्च की गई कुल राशि के बिल-वाउचर।
विवाह बंधन में बंधे उन सभी 300 वर-वधुओं के नाम और पते की सूची।
लापरवाही की हद सुनवाई से भी गायब रहे जन सूचना अधिकारी
हैरानी की बात यह है कि कानूनन 30 दिनों के भीतर यह जानकारी दी जानी थी, लेकिन जन सूचना अधिकारी बलरामपुर इस पर कुंडली मारकर बैठे रहे।
जब परेशान होकर आवेदिका ने प्रथम अपील दायर की, तो 27 फरवरी 2026 को हुई आधिकारिक सुनवाई में खुद जन सूचना अधिकारी हाजिर तक नहीं हुए! उन्होंने अपनी जगह एक सहायक ग्रेड-03 कर्मचारी इन्द्र साय किण्डो को भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली, जबकि आवेदिका खुद भी उपस्थित नहीं हो सकीं।
अवलोकन में पाया गया कि जन सूचना अधिकारी द्वारा आवेदिका को सूचना का अधिकार आवेदन के तहत चाही गई जानकारी निर्धारित समयावधि 30 दिवस के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अब मुफ्त में देनी होगी जानकारी, राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है मामला
इस खुली लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी सुश्री बिस्मिता पाटले ने आदेश पारित किया है कि जन सूचना अधिकारी अब आवेदिका को मांगी गई सभी जानकारियां नि:शुल्क रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से तुरंत उपलब्ध कराएं।इस आदेश के साथ ही विभाग ने इस स्तर पर प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया है।
अंतिम चेतावनी, यदि इसके बाद भी विभाग जानकारी छुपाने की कोशिश करता है या आवेदिका इस आदेश से असंतुष्ट रहती हैं, तो वे छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग (सेक्टर-19, नॉर्थ ब्लॉक, अटल नगर, रायपुर) में द्वितीय अपील दायर कर सकती हैं, जहां दोषी अधिकारी पर भारी जुर्माने की गाज भी गिर सकती है।
अब देखना यह है कि सामूहिक विवाह के खर्चों का सच्चा चिट्ठा बाहर आता है या अधिकारी इसे दबाने का कोई नया रास्ता ढूंढते हैं!








