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​भक्त की इच्छा पूरी करने भगवान लेते हैं अवतार: भागवताचार्य पं. अश्वनी दुबे

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रतनपुर संवाददाता – विमल सोनी
माली बाड़ी रतनपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन धूमधाम से मनाई गई गोवर्धन पूजा, हुआ रुक्मिणी विवाह का आयोजन
माली बाड़ी, रतनपुर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पुराण में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह भव्य आयोजन श्रीमती कृष्णा पांडेय, पं. विनय पांडेय, विनिता पांडेय, संजय पांडेय एवं रागिनी पांडेय द्वारा अपने पूजनीय स्व. रामसनेही पांडेय की पावन स्मृति में कराया जा रहा है।
कथा के पांचवें दिन सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं. अश्वनी दुबे जी ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और रुक्मिणी विवाह का अत्यंत भावपूर्ण व जीवंत प्रसंग प्रस्तुत किया।
भगवान भाव के भूखे हैं
कथा व्यास पं. अश्वनी दुबे जी ने श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुए कहा कि भगवान हमेशा अपने भक्तों के अधीन रहते हैं और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए ही धरा पर अवतार लेते हैं। भगवान को छप्पन भोग की आवश्यकता नहीं, वे तो केवल सच्चे भाव के भूखे हैं। जब-जब भक्तों पर संकट आता है, भगवान उनकी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं।
​ गोवर्धन पूजा और रुक्मिणी विवाह की जीवंत झांकी
​कथा के दौरान जब गोवर्धन पूजा और भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग आया, तो पूरा पंडाल ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘श्याम सुंदर की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। आकर्षक झांकियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते हुए भगवान को छप्पन भोग लगाया और रुक्मिणी विवाह के पावन प्रसंग पर जमकर आनंद उठाया।
​प्रमुख संतो प्रबुद्धजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति
​इस धार्मिक महायज्ञ में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित जनों और संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर पुण्य लाभ कमाया। आज की पावन कथा में मुख्य रूप से श्रीमती सविता, लोकेश शुक्ला, श्रीमती सीमा लोकेश तिवारी, वंशिका पांडेय, महंत तारकेश्वर पुरी जी महाराज
पद्मिनी माँ, पं. आनंद नगरकर,के.आर. कौशिक,शंकर लाल पटेल,लक्ष्मी प्रसाद कश्यप,कन्हैया यादव, किशोर महावर,संतोष तिवारी,
पं. ओमप्रकाश दुबे,चंद्रशेखर दुबे
संतोष गुप्ता, वार्ड पार्षद मनोज पाटले,, मनोज यादव,सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। पांडेय परिवार ने कथा में पधारे सभी अतिथियों और भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए सभी से अंतिम दिन तक कथा का रसपान कर जीवन को कृतार्थ करने का आग्रह किया है।

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