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लातूर से आई दिल दहला देने वाली खबर, बैल की मौत के बाद बेबस पत्नी बनी दूसरा बैल, गरीबी की इस भयानक तस्वीर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया

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संवाददाता – रघुराज
महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली और मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें नम हो जाएंगी। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, जहां किसान को भगवान का दर्जा देकर अन्नदाता पुकारा जाता है। लेकिन आज भी ग्रामीण भारत के सुदूर अंचलों में गरीबी, लाचारी और प्रशासनिक उपेक्षा की ऐसी कड़वी हकीकत छिपी हुई है, जो हमारे विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल कर रख देती है। लातूर में आर्थिक तंगी से बेबस और लाचार एक गरीब किसान ने अपनी पत्नी को ही बैल की जगह हल में जोत दिया। इस दर्दनाक और दिल को दुखाने वाले दृश्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे देश के नागरिकों और शासन प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
यह पूरी घटना लातूर इलाके के एक छोटे से गांव की है, जहां एक अत्यंत गरीब किसान परिवार अपनी छोटी सी सूखी जमीन के टुकड़े पर खेती बाड़ी करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पालता है। अभी कुछ दिनों पहले ही इस इलाके में अचानक मौसम बदला और तेज आंधी तूफान के साथ आकाशीय बिजली गिरी। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से किसान के दो बैलों की जोड़ी में से एक तंदुरुस्त बैल की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। ग्रामीण इलाकों में छोटे और सीमांत किसानों के लिए उनके बैल सिर्फ पशु नहीं होते, बल्कि उनके परिवार के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य और उनकी रोजी-रोटी का इकलौता सहारा होते हैं। इस आकाशीय बिजली के गिरने से सिर्फ एक बैल की जान नहीं गई, बल्कि उस गरीब परिवार पर आर्थिक तबाही का बहुत बड़ा पहाड़ टूट पड़ा। दूसरा नया बैल खरीदने के लिए उस मजबूर किसान के पास एक भी रुपया नहीं था, और कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण कोई उसे नया कर्ज देने को भी तैयार नहीं था।
दूसरी तरफ खरीफ की फसल की बुवाई और खेत की जुताई का बेहद महत्वपूर्ण समय तेजी से निकला जा रहा था। अगर समय रहते खेत को नहीं जोता जाता और फसलों की बुवाई नहीं होती, तो पूरे साल भर इस गरीब परिवार के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाती। नया बैल खरीदने या ट्रैक्टर किराए पर लेने की औकात इस किसान परिवार की बिल्कुल भी नहीं थी। ऐसे बेहद कठिन और परीक्षा के समय में किसान की पत्नी ने जो कदम उठाया, वह भारतीय नारी के अटूट त्याग और समर्पण की मिसाल तो है ही, लेकिन साथ ही साथ यह हमारे समाज की सबसे बड़ी लाचारी को भी दर्शाता है।
महिला ने अपने पति की लाचारी और आंखों के आंसुओं को देखा और खुद ही दूसरे बैल की जगह हल के जुए को अपने कोमल कंधों पर रख लिया। सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें यह साफ देखा जा सकता है कि हल के एक तरफ तो एक बैल बंधा हुआ है, लेकिन दूसरी तरफ वह बेबस महिला अपनी पूरी शारीरिक ताकत लगाकर तपती धूप और कड़कती गर्मी में खेत को आगे की ओर खींच रही है। उसका पति रोते हुए पीछे से हल को संभाल रहा है और मिट्टी को पलट रहा है। रास्ते से गुजर रहे किसी राहगीर ने इस भयानक बेबसी को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया और इंटरनेट पर अपलोड कर दिया, जिसके बाद से यह वीडियो आग की तरह फैल गया है।
महाराष्ट्र का लातूर और पूरा मराठवाड़ा क्षेत्र वैसे भी हमेशा से कम बारिश, भयंकर सूखे और कृषि संकट के कारण देश भर में सुर्खियों में रहता है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कपास और सोयाबीन की नकदी फसलों की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रकृति की बेरुखी और सिंचाई के आधुनिक साधनों की भारी कमी की वजह से यहां के किसान हमेशा साहूकारों के कर्ज के जाल में फंसे रहते हैं। जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो इन छोटे किसानों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं होता। सरकारी मुआवजे की कागजी प्रक्रिया इतनी धीमी और जटिल होती है कि संकट के तुरंत बाद किसान को कोई सहायता नहीं मिल पाती। यही वजह है कि इस स्वाभिमानी किसान परिवार ने किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय इस बेहद कठिन, अमानवीय और दर्दनाक रास्ते को चुनना बेहतर समझा।
जैसे ही यह वीडियो फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, वैसे ही देश भर के लोगों का गुस्सा और दुख फूट पड़ा। लोग इस दृश्य को देखकर जहां एक तरफ महिला के जज्बे और अपने पति के प्रति उसके असीम प्रेम की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र और लचर कृषि व्यवस्था पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि आज के आधुनिक और डिजिटल भारत के दौर में, जहां हम चांद और मंगल पर जाने की बातें करते हैं, वहां हमारे देश के अन्नदाता को दो वक्त की रोटी के लिए इस तरह जानवरों की तरह खेतों में जुतने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह पूरी मानवता के लिए शर्म की बात है।
यह मार्मिक घटना किसी एक अकेले किसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश के उन करोड़ों सीमांत और छोटे किसानों की जीती जागती तस्वीर है जो हर दिन अपनी फसलों को उगाने के लिए प्रकृति और व्यवस्था दोनों से अकेले दम पर लड़ रहे हैं। सरकार की बड़ी-बड़ी फाइलें और नीतियां भले ही कृषि लोन माफी, मुफ्त बीज और भारी सब्सिडी के दावों से भरी पड़ी हों, लेकिन धरातल की असली हकीकत लातूर की इस सूखी और फटी हुई मिट्टी की तरह ही बेहद कठोर और कड़वी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक जमीनी स्तर पर जरूरतमंद गरीब किसानों तक सही समय पर सीधी मदद पहुंचाने का सरकारी तंत्र दुरुस्त नहीं होगा, तब तक गरीबी और बेबसी की ऐसी दिल को चीर देने वाली तस्वीरें हमारे सामने आती रहेंगी और हमें शर्मिंदा करती रहेंगी। अब देखना यह है कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद क्या स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की नींद टूटती है या हमेशा की तरह इस बार भी इस गरीब और लाचार किसान परिवार को अपने हाल पर ही छोड़ दिया जाएगा। देश के सभी जागरूक नागरिकों को इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करना चाहिए ताकि इस बेबस परिवार की आवाज सरकार के बहरे कानों तक पहुंच सके और इन्हें तुरंत आर्थिक सहायता और खेती के लिए नए बैल मिल सकें।

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