Home चर्चा में डीआईईटी जांजगीर-चांपा में फेरबदल के बाद भी कार्यमुक्ति पर सवाल, क्या शासन...

डीआईईटी जांजगीर-चांपा में फेरबदल के बाद भी कार्यमुक्ति पर सवाल, क्या शासन के आदेश की अवहेलना?

8
0

जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 11 जून 2026 को जारी प्रशासनिक आदेश के तहत डीआईईटी (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) जांजगीर-चांपा में नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। आदेश के अनुसार प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत श्री भुनेश्वर प्रसाद साहू की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें नवीन पदस्थापना प्रदान की गई है, जबकि डॉ. कुंदिनी बाघ द्विवेदी को डीआईईटी जांजगीर-चांपा का नया प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है।
हालांकि शासन का आदेश जारी होने के बाद भी कार्यभार हस्तांतरण और कार्यमुक्ति की प्रक्रिया को लेकर शिक्षा जगत में कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब शासन ने स्पष्ट रूप से नवीन पदस्थापना का आदेश जारी कर दिया है, तब संबंधित अधिकारी द्वारा तत्काल कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थ स्थान पर योगदान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

पहले भी विवादों में रहा कार्यकाल
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, डीआईईटी जांजगीर-चांपा में प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यकाल के दौरान श्री भुनेश्वर प्रसाद साहू का कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों, विशेषकर व्याख्याता सुरेश साहू सहित अन्य कर्मचारियों के साथ विवाद चर्चा का विषय रहा था। बताया जाता है कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली और संस्थान के संचालन को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों के कारण जिला प्रशासन स्तर पर भी शिकायतें सामने आई थीं।
चर्चा यह भी है कि पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा शासन को आवश्यक कार्रवाई एवं स्थानांतरण संबंधी अनुशंसा भेजी गई थी। अब जब शासन ने स्वयं प्रशासनिक आधार पर फेरबदल का आदेश जारी कर दिया है, तब भी आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन में विलंब कई सवाल खड़े कर रहा है।

अवकाश के सहारे पद पर बने रहने की चर्चा
शिक्षा विभाग के गलियारों में यह चर्चा भी है कि नवीन पदस्थापना के बावजूद अवकाश लेकर पदभार हस्तांतरण की प्रक्रिया को टालने का प्रयास किया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो यह शासन की मंशा और प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अधिकारी के स्थानांतरण आदेश के बाद संस्थान के सुचारु संचालन हेतु समयबद्ध तरीके से कार्यभार हस्तांतरण आवश्यक होता है। इससे प्रशासनिक निरंतरता बनी रहती है और नए अधिकारी को कार्य प्रारंभ करने में अनावश्यक बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता।

डीआईईटी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान पर पड़ सकता है असर
डीआईईटी जिले में शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक अनुसंधान, नवाचार आधारित शिक्षण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया लंबित रहने से प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विभागीय बैठकों तथा आगामी शैक्षणिक योजनाओं के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षक संगठनों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि शासन के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि संस्थान में प्रशासनिक स्पष्टता बनी रहे और नए प्रभारी प्राचार्य अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन प्रभावी ढंग से कर सकें।

शासन और जिला प्रशासन से अपेक्षा
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि स्थानांतरण आदेश के बाद भी कार्यमुक्ति एवं पदभार हस्तांतरण में अनावश्यक विलंब हो रहा है, तो जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग को मामले की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश जारी करने चाहिए। इससे शासन के आदेशों की गरिमा बनी रहेगी तथा विभागीय अनुशासन भी सुनिश्चित होगा।
डीआईईटी जांजगीर-चांपा में हुए इस प्रशासनिक फेरबदल का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और परिणाममुखी बनाना है। ऐसे में यह आवश्यक है कि शासन द्वारा जारी आदेशों का समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले की शिक्षा व्यवस्था को इसका अपेक्षित लाभ मिल सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here