रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश की सड़कों पर वाहन चलाने वाले चालकों के लिए परिवहन विभाग ने एक बड़ा और बेहद सख्त फैसला लिया है। अब राज्य में बिना सोचे-समझे या बिना जरूरी कागजात के गाड़ी लेकर निकलना वाहन मालिकों पर बहुत भारी पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने फर्जी तरीके से पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने वाले खेल को पूरी तरह से बंद करने के लिए एक नया नियम लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब बिना वन टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी के किसी भी गाड़ी का प्रदूषण प्रमाण पत्र कंप्यूटर पर जनरेट ही नहीं हो पाएगा।
पहले के समय में अधिकांश लोग वाहन चलाते वक्त आरसी बुक, ड्राइविंग लाइसेंस और बहुत हुआ तो इंश्योरेंस की कॉपी अपने पास रख लेते थे, लेकिन प्रदूषण कार्ड को लेकर अक्सर लापरवाही देखी जाती थी। बहुत से वाहन चालक प्रदूषण जांच केंद्रों पर जाकर महज ₹50 देकर बिना गाड़ी की वास्तविक जांच कराए ही फर्जी पीयूसी सर्टिफिकेट बनवा लेते थे और अपनी जेब में रखकर बेफिक्र घूमते थे। अब परिवहन विभाग ने इस फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
नए नियम के अनुसार, जब कोई वाहन चालक अपनी गाड़ी का पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए किसी भी अधिकृत प्रदूषण केंद्र पर जाएगा, तो वहां कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में गाड़ी का नंबर दर्ज करते ही वाहन मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। यह वही मोबाइल नंबर होगा जो वाहन खरीदते समय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया था। जब तक जांच केंद्र का संचालक उस ओटीपी को सॉफ्टवेयर में दर्ज नहीं करेगा, तब तक सिस्टम गाड़ी की प्रदूषण जांच की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएगा और न ही सर्टिफिकेट जारी होगा।
इस नियम के लागू होने से उन लोगों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है जिन्होंने कई साल पहले गाड़ी खरीदी थी और उनका वह पुराना मोबाइल नंबर अब या तो बंद हो चुका है या कहीं खो गया है। ऐसी स्थिति में पीयूसी सेंटर संचालक चाहकर भी उस गाड़ी का प्रदूषण कार्ड नहीं बना पाएगा। इसके बाद जैसे ही वह वाहन चालक बिना पीयूसी सर्टिफिकेट के सड़क पर निकलेगा, चौराहों पर लगे हाईटेक आईटीएमएस कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेंगे। इसके बाद वाहन मालिक के पते पर सीधे ₹10,000 का ऑनलाइन ई-चालान भेज दिया जाएगा।
नए मोटर व्हीकल एक्ट के कड़े नियमों के तहत अगर कोई व्यक्ति पहली बार बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट के पकड़ा जाता है, तो उस पर सीधे ₹10,000 का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा और साथ ही उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा। वहीं, अगर कोई चालक दूसरी बार भी इसी लापरवाही के साथ सड़क पर पकड़ा जाता है, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ उसे 6 महीने तक की जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। यह नियम सिर्फ आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि उन पीयूसी केंद्रों के लिए भी कड़ा सबक है जो बिना जांच किए अवैध रूप से प्रमाण पत्र बांटते थे। ऐसे केंद्रों के पकड़े जाने पर उनका लाइसेंस तुरंत ब्लॉक किया जा रहा है।
इस बड़ी मुसीबत और भारी जुर्माने से बचने के लिए वाहन मालिकों को तुरंत अपने वाहनों के दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। यदि वाहन के साथ लिंक पुराना मोबाइल नंबर बंद हो चुका है, तो उसे तुरंत परिवहन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या अपने नजदीकी आरटीओ कार्यालय में जाकर अपडेट करवा लेना चाहिए। मोबाइल नंबर अपडेट होने के बाद महज कुछ रुपयों की जांच और दो मिनट का समय देकर वैध पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाया जा सकता है, जो वाहन चालकों को ₹10,000 के बड़े आर्थिक फटके और कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा।








