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”कुछ न कुछ करते रहिए”

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ज़िंदगी का भरोसा नहीं होता,
कब शाम ढले, पता नहीं होता।
इसलिए कुछ न कुछ करते रहिए,
और जीवन में कुछ कर जाइए।
कुछ न कुछ करते रहिए,
कुछ ऐसा कमाल करिए।
किसी के लिए मिसाल बनिए,
जीवन को सार्थक करिए।
मौक़ा मिले तो आगे बढ़िए,
हर पल का सदुपयोग करिए।
बच्चों के संग बैठिए,
बुज़ुर्गों से अनुभव लीजिए।
मुसीबत में किसी के काम आइए,
मुस्कुराकर हर दर्द मिटाइए।
किसी के पास स्वयं जाइए,
किसी को अपने पास बुलाइए।
किसी को उत्साहित करिए,
किसी से प्रेरित हो जाइए।
प्रेम, करुणा और सेवा से,
मानवता का मान बढ़ाइए।
ज्ञान मिले तो बाँट दीजिए,
अज्ञान का अँधियारा हटाइए।
दीपक बनकर राह दिखाइए,
भटकों को मंज़िल तक पहुँचाइए।
गिरते को हाथ थाम लीजिए,
रोते को थोड़ा हँसा दीजिए।
अपने हिस्से की खुशियाँ बाँटकर,
किसी का जीवन महका दीजिए।
पेड़ लगाइए, छाया बढ़ाइए,
धरती का ऋण चुकाइए।
सत्कर्मों की सुगंध बिखेरकर,
अपनी पहचान बनाइए।
नाम नहीं, काम छोड़ जाइए,
जो युगों तक याद आए।
ऐसा जीवन जी जाइए,
जो औरों के काम आए।
कुछ न कुछ करते रहिए,
ज़िंदगी में कुछ कर जाइए।
ऐसा कर्म कर जाइए कि,
अमर उदाहरण बन जाइए।
✍️:राजकुमार सोनी रायपुर

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