संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा।
महिला सशक्तिकरण केवल एक सरकारी योजना या नारा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वह शक्ति है जो परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास की दिशा तय करती है। जांजगीर-चांपा जिले की महतारी सेवा समिति मानिकपुरी महिला समाज की महिलाओं ने अपने अथक परिश्रम, सामूहिक प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर इस सत्य को एक बार फिर सिद्ध कर दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र जर्वे के लिए 1000 झोलों का निर्माण कर समिति की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता, श्रम और संगठन की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है।
यह उपलब्धि केवल सिलाई कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान की एक प्रेरणादायक कहानी है। जिस समाज में कभी महिलाओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित समझी जाती थी, वहीं आज ये महिलाएं उत्पादन, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
महतारी सेवा समिति की महिलाओं ने यह साबित किया है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। 1000 झोलों का निर्माण केवल एक लक्ष्य नहीं था, बल्कि यह महिलाओं की कार्यक्षमता, अनुशासन और सामूहिक एकता की परीक्षा भी थी, जिसे उन्होंने सफलता के साथ पूरा किया।
इस कार्य से महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं तथा उनमें आत्मविश्वास का संचार हुआ है। समिति का उद्देश्य केवल आय अर्जित करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाना भी है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार का संगम
आज जब प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है, ऐसे समय में कपड़े के झोलों का निर्माण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
महतारी सेवा समिति की महिलाओं ने रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता का संदेश भी दिया है।
कृषि विज्ञान केंद्र जर्वे के लिए तैयार किए गए ये झोले प्लास्टिक मुक्त अभियान को मजबूती प्रदान करेंगे। इससे यह संदेश जाता है कि महिला समूह केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
महिलाओं की सामूहिक शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण
समिति की महिलाओं ने मिलकर जिस प्रकार यह कार्य पूरा किया, वह महिला एकजुटता का उत्कृष्ट उदाहरण है। अलग-अलग आयु वर्ग और सामाजिक पृष्ठभूमि की महिलाओं ने एक साथ मिलकर कार्य किया और साबित किया कि सामूहिक प्रयास से बड़े लक्ष्य आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।
समिति की सदस्याओं का कहना है कि चाहे सरकारी संस्थाओं का कार्य हो या निजी क्षेत्र का, वे हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। यही आत्मविश्वास उन्हें सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
समिति नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका
इस उपलब्धि के पीछे समिति के पदाधिकारियों और सदस्याओं का समर्पण और नेतृत्व भी सराहनीय रहा। जिला अध्यक्ष श्रीमती रमशिला मानिकपुरी के मार्गदर्शन में समिति लगातार महिलाओं को रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने का कार्य कर रही है।
इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष श्रीमती शकुनतला महंत, जिला सचिव श्रीमती संदीपा मानिकपुरी, जिला कोषाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी मानिकपुरी, श्रीमती अनुपा मानिकपुरी, श्रीमती सुनीता मानिकपुरी श्रीमती मधुलता महंत, श्रीमती राजकुमारी महंत, श्रीमती महेश्वारी मानिकपुरी, श्रीमती रंजनी महंत, श्रीमती बबली मानिकपुरी, श्रीमती सोनिया महंत, श्रीमती मधु मानिकपुरी, श्रीमती तुलसी मानिकपुरी, श्रीमती कृष्णा महंत, श्रीमती रुक्मणी मानिकपुरी, श्रीमती मीना नागरा, श्रीमती राधिका मानिकपुरी, श्रीमती ममता मानिकपुरी, श्रीमती निशा महंत, श्रीमती अंजली मानिकपुरी, श्रीमती प्रीति महंत, श्रीमती कृति महंत एवं श्रीमती बबली महंत सहित अनेक सदस्याओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा
महतारी सेवा समिति की यह सफलता केवल एक संगठन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि जिले की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह उदाहरण बताता है कि यदि महिलाएं संगठित होकर कार्य करें तो वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं, बल्कि समाज में नेतृत्वकारी भूमिका भी निभा सकती हैं।
आज आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है। महतारी सेवा समिति की महिलाओं ने अपने कार्यों से यह सिद्ध कर दिया है कि नारी केवल…








