अंम्बिकापुर संवाददाता – उमेश कुमार प्रजापति
सरगुजा जिले के मैनपाट जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत उरंगा में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने सरपंच और पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कई निर्माण कार्य केवल कागज़ों में दर्शाकर सरकारी राशि का ऑनलाइन भुगतान कर दिया गया, जबकि धरातल पर कार्य दिखाई नहीं देता। यहां तक कि डस्टबिन की खरीद भी सिर्फ दस्तावेजों में ही दर्ज की गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पंचायत के आय-व्यय और पिछले कुछ वर्षों के विकास कार्यों का हिसाब-किताब सचिव से मांगा गया तो उन्होंने जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने मामले की शिकायत जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम सभा में नहीं पहुंची सचिव, ग्रामीणों ने सौंपा हस्ताक्षरयुक्त आवेदन
ग्रामीणों के अनुसार 24 जून 2026 को ग्राम पंचायत में ग्राम सभा का आयोजन किया गया था, लेकिन पंचायत सचिव दोपहर 1 बजे तक भी ग्राम सभा में नहीं पहुंचीं। ग्रामीणों का कहना है कि न तो विकास कार्यों की जानकारी दी गई और न ही पंचायत के खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।
इससे नाराज ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन जनपद पंचायत कार्यालय से पहुंचे एडीओ (सहायक विकास अधिकारी) को सौंपते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।


पंचों ने भी लगाए गंभीर आरोप
मामले में पंचायत के पंचों ने भी सचिव पर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें पंचायत के आय-व्यय और विकास कार्यों की कोई जानकारी नहीं दी जाती। पंचों और ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक वर्ष पहले कई निर्माण कार्यों के नाम पर अग्रिम राशि निकाल ली गई, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत भवन के पास नाली निर्माण के नाम पर 16 हजार रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। यह राशि “जय मां दुर्गा ऑर्डर सप्लायर एंड कंस्ट्रक्शन वर्क” नामक फर्म के खाते में ऑनलाइन जारी की गई, जबकि मौके पर कार्य नहीं हुआ।
सीईओ ने जांच का दिया भरोसा
वहीं मामले को लेकर मैनपाट जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी खुशी सारथी ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त हुई है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों, भुगतान और खर्च का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराया जाए ताकि सरकारी धन के उपयोग की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। अब पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।








