Home चर्चा में इस्लामिक नववर्ष पर शहादत के सम्मान का पर्व मोहर्रम मनाया गया…

इस्लामिक नववर्ष पर शहादत के सम्मान का पर्व मोहर्रम मनाया गया…

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 अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है मोहर्रम… अधिवक्ता चितरंजय 
इस्लामिक नव वर्ष 1448 हिजरी की शुरुआत का प्रतीक मुहर्रम 16 जून 2026 से शुरू होकर आज 26जून को सबसे महत्वपूर्ण दिन आशूरा है तथा 10वां  रोहा मोहर्रम आज नगर में मनाया गया और 9 वें और 10वें तारीख (25-26 जून) को रोजा (उपवास) रखा गया जबकि शिया प्रथा के अनुसार यह दिन शोक दिवस का प्रतीक है, जिसमें कर्बला के जंग में पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दिया जाता है।
इस अवसर पर इस्लामिक नववर्ष की बधाई और शहादत दिवस पर इंसानियत के लिए शहीद हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देते हुए अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने बताया कि इस्लामिक पर्व मोहर्रम की कहानी कर्बला की उस ऐतिहासिक जंग की दास्तान है, जो करीब 1400 साल पहले लड़ी गई थी। यह बुराई के खिलाफ सच्चाई और इंसानियत की रक्षा के लिए पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के उस सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाती है जिसमें इराक में अत्याचारी शासक यज़ीद अपनी सत्ता को मज़बूत करने के लिए इस्लाम के बुनियादी उसूलों को बदलना चाहता था, तब पैगंबर मोहम्मद के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन ने यज़ीद की इस ज़ालिम हुकूमत और उसकी क्रूर नीतियों का समर्थन करने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि वे अन्याय के आगे कभी नहीं झुकेंगे,   जिसके बाद इमाम हुसैन अपने परिवार और 72 समर्थकों के साथ मदीना से निकलकर इराक के कर्बला पहुंचे जहां यज़ीद की विशाल सेना ने उन्हें घेर लिया तथा युद्ध के दौरान यज़ीद की सेना ने इमाम हुसैन के काफिले के लिए फुरात नदी का पानी तक बंद कर दिया और तपते रेगिस्तान में उनके छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को भयंकर भूख-प्यास का सामना करना पड़ा और मुहर्रम की 10 वें तारीख ‘यौमे- आशूरा’ के दिन इमाम हुसैन और उनके सभी साथियों ने भूखे-प्यासे रहकर भी इस्लाम और मानवता की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी जिसके याद में इस्लाम के लिए उनके शहादत को सम्मान देने हेतु इस्लामिक पर्व मोहर्रम पर शिया समुदाय के लोग इमाम हुसैन की शहादत दिवस पर काले कपड़े पहनकर और जुलूस(ताज़िया) निकालकर मातम मनाते हैं तो वहीं सुन्नी समुदाय के लोग मोहर्रम पर रोजा (उपवास) रखते हैं और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर उनको श्रद्धांजलि देते हैं।
आज जामा मस्जिद सक्ती- में सुबह मुस्लिम सामाज के लोगों के द्वारा आशुरा की नमाज अदा की गई और नमाज़ के बाद सबने पुरी दुनिया के लिए अमन व चैन की दुआएं की गई।

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