महासमुंद संवाददाता – अब्दुल रफ़ीक खान
कोमाखान (महासमुंद)।
शासन-प्रशासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों और आदेशों की धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला कोमाखान विकासखण्ड बागबाहरा से सामने आया है। महिलाओं में होने वाले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) की रोकथाम के लिए राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण अभियान के तहत आज बड़ी लापरवाही देखने को मिली।
विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) बागबाहरा द्वारा जारी आदेश में यह साफ उल्लेख किया गया था कि स्वास्थ्य विभाग की टीम (ANM/मितानिन) स्वयं स्कूल परिसर में आकर 14 से 15 वर्ष की छात्राओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करेगी। स्कूल प्राचार्यों और प्रधान पाठकों को निर्देश दिया गया था कि वे शाला परिसर में ही आवश्यक बैठक व्यवस्था एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएं।

आदेशों की अवहेलना: 1 किलोमीटर पैदल चलीं छात्राएं
आदेशों के विपरीत, कोमाखान में नियमों को ताक पर रखकर छात्राओं को शाला परिसर में टीका लगाने के बजाय लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल बुलाया गया। गंभीर बात यह रही कि इन नाबालिग छात्राओं को स्कूल प्रबंधन द्वारा कड़ी धूप और व्यस्त मार्ग पर पैदल चलाकर अस्पताल लाया गया।
बड़ा सवाल: कोई दुर्घटना होती तो जिम्मेदारी किसकी?
अस्पताल के कॉरिडोर में कतार लगाकर बैठी छात्राओं की तस्वीरें प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि व्यस्त सड़क पर पैदल यात्रा के दौरान यदि किसी छात्रा के साथ कोई अनहोनी या सड़क दुर्घटना हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? क्या स्कूल प्रशासन या स्थानीय स्वास्थ्य विभाग इसकी जिम्मेदारी लेता?

सड़कों पर सन्नाटा, प्रशासन मौन
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कोमाखान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की खुलेआम लापरवाही होने के बावजूद स्थानीय शासन और प्रशासन पूरी तरह मौन साधे हुए है। सरकारी आदेश की इस तरह धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि आदेश का उल्लंघन कर बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले जिम्मेदार स्टाफ और प्रबंधन के खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।








