विधान सभा के पावस सत्र में विपक्षी दल कांग्रेस के द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव जनता के साथ विश्वासघात है, यह कहते हुए उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि मात्र अविश्वास प्रस्ताव का आडंबर जनता के भावनाओं के साथ छलावा है क्योंकि आज जनता को शासन-प्रशासन में व्याप्त अराजकता को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और उसके नेताओं पर भरोसा था कि पूरी ताकत से विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में अपनी ताकत दिखाएगा और अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के समय सत्ता पक्ष के नाराज विधायकों का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष सहयोग से सरकार को घेरने की पूरी कोशिश होगी, परंतु विपक्ष ने नो कॉन्फिडेंस मोशन पर डिवीज़न अथवा वोटिंग की मांग ही नहीं किया, जिससे विपक्ष के नीति और नियत दोनों संदेह के दायरे में है जिसे अब जनता बखूबी समझ गई है कि विपक्ष का उद्देश्य सरकार गिराना नहीं, बल्कि विपक्ष ने इस अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर सदन और जनता में विश्वास हासिल करने का बड़ा अवसर दे दिया।
भारतीय राजनीति में वैसे भी यह स्थापित सत्य है कि कांग्रेस सत्ता की बेरुखी लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं कर सकती है, इसलिए कांग्रेसी नुमाइंदे आदतन सत्ताभोगी होने से सरकार के सांठगांठ करते हुए दिखावे का विरोध करते नजर आते हैं।
फिर हमारा शक्ति जिला हमारे नेता प्रतिपक्ष के प्रभार का जिला ही नजर आता है जिसे जिले के भाजपाई भी स्वीकार करने में नहीं हिचकते है बल्कि यह चर्चा आम है कि भाजपा के टिकट के साथ अब संगठन में भी नेता जी की अंदर खाने से सहमति की झलक मिलती है।
ऐसी स्थिति में साफ नजर आ रहा है कि भविष्य में शक्ति जिले में पुनः नेता जी कांग्रेस की टिकट के साथ भाजपा के उम्मीदवार तय करने में बखूबी भूमिका अदा करेंगे, क्योंकि भाजपा की सरकार में भी इस क्षेत्र में विकास के हर काम का श्रेय भाजपा के बजाय माननीय नेता प्रतिपक्ष को बखूबी मिल रहा है तो वहीं भाजपा के जन प्रतिनिधि दुखी मन एवं दबे जुबान से अपनी उपेक्षा का रोना रोते नजर आते हैं।
निश्चित रुप से सत्ता और विपक्ष का ऐसा साफ घालमेल पहली बार दिखाई दे रहा है जो लोकतंत्र के लिए घातक है क्योंकि सशक्त और ईमानदार विपक्ष के बिना सरकार निरंकुश हो जाती है जिसका सीधा खामियाजा आम आदमी भोगता है फिर विगत चुनाव में अंदर खाने के दूरभि संधि को जनता अभी भी नहीं भूल पाई है और आज भी इसके डायरेक्ट इम्पैक्ट से बीजेपी को ही नुकसान है। उम्मीद है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार और संगठन इसकी सुध लेकर समय रहते कार्यकर्ताओं को साध ले, वरना शक्ति जिले में क्लीन बोल्ड का इतिहास रिपीट होना संभव है।







