विमल सोनी –
रतनपुर गणेश उत्सव में सार्वजनिक पंडालों या घरों में प्रतिमा की स्थापना से पहले भूमि और स्थल की पवित्रता व शुद्धि के लिए भूमि पूजन तथा वेदी-मंडप संस्कार की प्राचीन परंपरा का निर्वाह किया जाता है जिसकी तैयारीया बज्र गणेश समिति ने कर ली है लगभग ग्यारह वर्षो की परंपरा का निर्वहन करते आ रही यह समिति हर वर्ष कुछ नया करने की कोशिस मे लगे रहते है इसी कड़ी मे इस वर्ष विशेष साज सज्जा लाइट और विशाल प्रतिमा की स्थापना की तैयारी की जा रही है जिसके तहत पंडित विकास दुबे द्वारा प्रतिमा स्थापना स्थल अनुष्ठान में स्थल की सफाई, गंगाजल छिड़काव, और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश आह्वान किया गया ।
भूमि और स्थल पूजन की परंपरा स्थल : स्थापना स्थल की गोबर-मिट्टी या गंगाजल से लिपाई-पुताई कर उसे शुद्ध किया जाता है।
स्वस्तिक व रंगोली: जमीन पर कुमकुम-हल्दी से अष्टदल या स्वास्तिक बनाकर अक्षत व पुष्प रखे जाते हैं।
आचार्य द्वारा मंत्र: नगर पुरोहित या विद्वान पंडित के जरिए वेदमंत्रों के साथ भूमि की पूजा और आधार चौकी (पाटा) स्थापित की जाती है।स्थापना से जुड़े मुख्य नियम दिशा चयन: मंडप या चौकी को हमेशा घर या पंडाल के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखा जाता है।कलश स्थापना: वेदी के दाहिने भाग में जल-सुपारी-अक्षत से सुसज्जित पवित्र कलश रखा जाता है।
गणेश, गजानन, विनायक, लंबोदर, वक्रतुंड और एकदंत के नाम से पुकारे जाने वाले भगवान श्री गणेश का 25 अगस्त को पृथ्वी पर शुभागमन हो रहा है। जिसकी तैयारीयों मे रतनपुर ब्रज गणेश समिति ने अपनी ताल ठोक दी है प्रथम पूज्य श्री गणेश हमारे अति विशिष्ट, सौम्य और आकर्षक देवता हैं। उनके आगमन के साथ ही पृथ्वी पर चारों तरफ रौनक, रोमांच और रोशनी बिखर जाती है।







