वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित बड़े सैन्य अभियान को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस आश्वासन देता है और रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमत होता है, तो सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सूत्रों के अनुसार अमेरिका, उसके सहयोगी देशों और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच पिछले कुछ दिनों से लगातार बातचीत चल रही है। इस दौरान ईरान की ओर से भी कुछ सकारात्मक संकेत मिलने की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा भी कम होगा।
सऊदी अरब ने जताई चिंता
जानकारी के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प से बातचीत कर ईरान पर व्यापक हमले के संभावित परिणामों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। सऊदी नेतृत्व का मानना है कि किसी बड़े सैन्य अभियान से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर जवाबी हमलों का खतरा पैदा हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना मुख्य मुद्दा
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है। अमेरिका और उसके सहयोगी चाहते हैं कि इस मार्ग से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहे। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि जलमार्ग को पूरी तरह खोलना और क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी समझौते की प्रमुख शर्त होगी।
परमाणु कार्यक्रम पर भी फोकस
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े जोखिमों को समाप्त करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान परमाणु गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करता है तो सैन्य विकल्प को पीछे रखा जा सकता है।
अभी टला है हमला, खतरा पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि ट्रम्प ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वार्ता विफल होती है या ईरान अपने वादों से पीछे हटता है तो अमेरिका सभी विकल्पों पर विचार करेगा। दूसरी ओर ईरान ने भी किसी भी संभावित हमले की स्थिति में कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है।
मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।







