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27.894 किलो गांजा बरामदगी मामले में सुप्रीम कोर्ट से आरोपी को जमानत, व्यक्तिगत तलाशी में नहीं मिला था मादक पदार्थ

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घर से लगी भाठा भूमि के गड्ढे से हुई थी बरामदगी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कब्जे और सचेत कब्जे का प्रश्न ट्रायल में होगा

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ से जुड़े एक NDPS मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मोहन सिंह कोशले उर्फ राकेश को जमानत देने का आदेश दिया है। मामला 27.894 किलोग्राम गांजा बरामदगी से संबंधित है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने अन्य अधिवक्ताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 18 सितंबर 2026 को पारित आदेश में आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए आरोपी को संबंधित सेशंस कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

यह मामला Criminal Appeal No. 4440 of 2026, @ SLP (Crl.) No. 17846/2026, @ Diary No. 24828/2026 – Mohan Singh Koshley @ Rakesh versus State of Chhattisgarh से संबंधित है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की।

व्यक्तिगत तलाशी में नहीं मिली थी कोई मादक पदार्थ

अभियोजन के अनुसार आरोपी को 20 मई 2025 को उसके घर के पास पकड़ा गया था। व्यक्तिगत तलाशी के दौरान उसके पास से कोई प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था।

इसके बाद आरोपी के घर से लगी भाठा भूमि में स्थित एक गड्ढे से दो बोरियों में कुल 27.894 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने का दावा किया गया। इसी बरामदगी के आधार पर आरोपी के विरुद्ध NDPS Act की धारा 20(b) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अभियोजन ने मेमोरेण्डम कथन को बनाया था आधार

मामले में अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी ने एक मेमोरेण्डम/कथित कथन में बताया था कि फरार सह-आरोपी राकेश वर्मा ने उसे गांजा रखने के लिए दिया था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी के पास लगभग 27 किलोग्राम गांजा रह गया था और इसे सुरक्षित रखने के लिए उसे 5,000 रुपये दिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान बरामदगी की प्रकृति और आरोपी के साथ बरामद मादक पदार्थ के संबंध से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

19 में से 10 गवाहों के बयान दर्ज, चार गवाह हुए hostile

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी और ट्रायल शुरू हो गया था। उस समय तक अभियोजन के 19 में से 10 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे।

महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि चार गवाह, जिनमें पंच गवाह भी शामिल था, अभियोजन के समर्थन में नहीं रहे और hostile हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय इस परिस्थिति को भी रिकॉर्ड में लिया।

धारा 37 की लागू होने की स्थिति भी ट्रायल में होगी तय

मामले में NDPS Act की धारा 37 के तहत जमानत की कठोर शर्तें लागू होने का प्रश्न भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 37 लागू होती है या नहीं, यह प्रश्न ट्रायल के दौरान परीक्षण का विषय होगा।

पीठ ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि कथित मादक पदार्थ आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद नहीं हुआ था

इसके अलावा न्यायालय ने यह प्रश्न भी विचारणीय माना कि जिस स्थान से गांजा बरामद किया गया, क्या वह आरोपी के विशेष या एकमात्र कब्जे में था और क्या आरोपी उस मादक पदार्थ के सचेत कब्जे (conscious possession) में था।

जमानत दी, लेकिन आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए इस स्तर पर आरोपी को जमानत का हकदार माना। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बरामदगी वाले स्थान पर आरोपी का विशिष्ट कब्जा, मादक पदार्थ पर उसका नियंत्रण और conscious possession जैसे प्रश्नों का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

इसके बाद पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए पूर्व आदेश को निरस्त किया और आरोपी को संबंधित ज्यूरिडिक्शनल सेशंस कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों एवं नियमों के अधीन जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी समेत अन्य ने की पैरवी

आरोपी मोहन सिंह कोशले उर्फ राकेश की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने अन्य अधिवक्ताओं के साथ पैरवी की। रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अविनाश दुबे, अधिवक्ता हरि अभिषेक पी., अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी तथा एओआर सोमनाथ पाढ़न उपस्थित रहे।

राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल ऋषभ साहू, एओआर अपूर्व शुक्ला, अधिवक्ता प्रह्लीन ए. शुक्ला तथा अधिवक्ता इलाश्री गौड़ उपस्थित थीं।

NDPS मामलों में कब्जे का प्रश्न अहम

यह आदेश उन NDPS मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को सामने रखता है, जहां कथित प्रतिबंधित पदार्थ आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से सीधे बरामद नहीं होता, बल्कि किसी अन्य स्थान से बरामद किया जाता है।

ऐसी स्थिति में बरामदगी वाले स्थान पर आरोपी का वास्तविक नियंत्रण और कब्जा तथा मादक पदार्थ के संबंध में उसके ज्ञान जैसे तथ्य साक्ष्यों के मूल्यांकन का हिस्सा बनते हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपी को मामले से दोषमुक्त किया जाना नहीं है। आरोपों की अंतिम सत्यता और आरोपी की दोषसिद्धि अथवा दोषमुक्ति का निर्धारण संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

मामले की जानकारी

आदेश दिनांक: 18 सितंबर 2026
प्रकरण: Mohan Singh Koshley @ Rakesh बनाम State of Chhattisgarh
Criminal Appeal No.: 4440 of 2026
SLP (Crl.) No.: 17846/2026
पीठ: न्यायमूर्ति अरविंद कुमार एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली
आरोपी की ओर से: अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी एवं अन्य

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