-स्वतंत्रता दिवस पर विशेष अतिथि के रूप में राष्ट्रपति भवन में सम्मान, राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के साथ लंच का मिला दुर्लभ अवसर
पुकार बाफना/बीजापुर, 21 अगस्त 2026/ नीति आयोग की बासागुड़ा परियोजना के तहत बीजापुर जिले के सेक्टर धर्मारम स्थित आंगनबाड़ी केंद्र धर्मारम-1 में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चंदना तिपनपल्ली ने जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। उनके उत्कृष्ट सेवाभाव और जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों को देखते हुए उन्हें स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सम्मानित किया गया।
चंदना 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल हुईं। छत्तीसगढ़ से एकमात्र आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में उनका चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। दुर्गम क्षेत्र में रहकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पित कार्यों को इस सम्मान के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान मिली।
राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के साथ लंच का मिला अवसर
सम्मान समारोह के अगले दिन 16 अगस्त को चंदना को भारत की राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के साथ लंच करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। उनके लिए यह पल बेहद खास और जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में शामिल हो गया। राष्ट्रपति भवन में देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ समय बिताने का यह अवसर उनके सेवाभावी कार्यों के लिए मिले सम्मान को और विशेष बनाता है।
दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों का किया भ्रमण
कार्यक्रम के तहत 17 अगस्त को चंदना को दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया। इसके बाद 18 अगस्त को वे ट्रेन से दिल्ली से रवाना हुईं और 20 अगस्त को सकुशल बीजापुर वापस पहुंचीं।
दुर्गम क्षेत्र में सेवाभाव को मिला राष्ट्रीय सम्मान
चंदना तिपनपल्ली ने बासागुड़ा परियोजना क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में निरंतर समर्पण के साथ कार्य किया है। बच्चों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके कार्यों की इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
चंदना की यह उपलब्धि बीजापुर जिले के लिए गौरव के साथ ही जिले की अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश है। उन्होंने यह साबित किया है कि समर्पण और सेवाभाव से किया गया जमीनी कार्य देश के सर्वोच्च मंच तक पहचान बना सकता है।







