नई दिल्ली/मुंबई। देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। पश्चिमी तट से लेकर मध्य भारत, उत्तर भारत और पूर्वी राज्यों तक बारिश, तेज हवाओं, जलभराव और बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। मुंबई में तेज बारिश के बाद कई सड़कें जलमग्न हो गईं और छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास भी गंभीर जलभराव देखा गया।
वहीं, बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और प्रभावित लोगों की संख्या 48 लाख के पार पहुंच गई है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए जारी मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मुंबई में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
मुंबई और उसके आसपास शनिवार को तेज बारिश का दौर देखने को मिला। कई निचले इलाकों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया। एयरपोर्ट के आसपास जलभराव के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जहां वाहनों को पानी से गुजरते हुए देखा गया।
मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और आसपास के क्षेत्रों के लिए बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। बारिश का असर आने वाले दिनों में भी बना रह सकता है।
मुंबई जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले महानगर में कुछ घंटों की तेज बारिश भी सड़क यातायात, लोकल ट्रेनों, हवाई यात्रा और कार्यालय आने-जाने वाले लाखों लोगों को प्रभावित कर सकती है। लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।
महाराष्ट्र से गुजरात तक भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 13 सितंबर के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, कोंकण और गोवा में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश, जबकि गुजरात क्षेत्र और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। सौराष्ट्र-कच्छ में भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर बना रह सकता है।
मौसम की इस सक्रिय प्रणाली का असर केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। प्रशासन के सामने सड़क संपर्क, ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों की सुरक्षा और नदियों-नालों के जलस्तर पर नजर रखने की चुनौती है।
बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 48 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
पूर्वी भारत में सबसे गंभीर स्थिति बिहार में बनी हुई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, करीब 48.35 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और 15 जिलों के 87 प्रखंडों तथा सैकड़ों ग्राम पंचायतों पर इसका असर पड़ा है। कई नदियों का जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है।
बाढ़ का असर केवल घरों और गांवों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव—
सड़क और रेल संपर्क,
कृषि और खड़ी फसलों,
स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं,
पशुधन,
राहत एवं बचाव कार्यों
पर पड़ रहा है।
कुछ इलाकों में नदियों के जलस्तर में कमी के संकेत मिलने के बावजूद प्रभावित आबादी का दायरा बड़ा होने के कारण राहत कार्य अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
पहाड़ी राज्यों में बढ़ा भूस्खलन का खतरा
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा लगातार बना रहता है। शिमला क्षेत्र में जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन की घटनाएं इस बात की चेतावनी हैं कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद मिट्टी ढीली होने से सड़कें, ढलान और निर्माण वाले क्षेत्र अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम चेतावनियों के अनुसार यात्रा की योजना बनाने की जरूरत है।
देश के कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
13 सितंबर के मौसम पूर्वानुमान में महाराष्ट्र और गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा कई अन्य राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। कई क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में—
निचले इलाकों में जलभराव,
स्थानीय स्तर पर बाढ़,
सड़क और रेल यातायात में बाधा,
पेड़ों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान,
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन,
बिजली गिरने की घटनाएं
हो सकती हैं।
मध्य भारत और छत्तीसगढ़ पर भी नजर जरूरी
देश में मानसूनी गतिविधियों के व्यापक होने के कारण मध्य भारत के राज्यों पर भी नजर बनी हुई है। मौसम प्रणालियों में बदलाव का असर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर तेज हवाओं के रूप में दिखाई दे सकता है।
विशेषकर किसानों के लिए यह मौसम दोहरी स्थिति पैदा कर सकता है। जहां बारिश से फसलों को नमी मिल सकती है, वहीं अत्यधिक बारिश होने पर जलभराव, फसल गिरने और खेतों में नुकसान की आशंका भी रहती है।
मौसम का बड़ा संकेत: देश में बारिश का वितरण बेहद असमान
वर्तमान स्थिति यह भी दिखाती है कि देश में मानसून एक समान नहीं है। कहीं कुछ घंटों की बारिश से महानगरों में जलभराव हो रहा है, कहीं नदियां उफान पर आकर लाखों लोगों को प्रभावित कर रही हैं और कहीं बारिश की कमी बनी हुई है।
यही कारण है कि आने वाले दिनों में केवल कुल बारिश की मात्रा नहीं, बल्कि कहां, कितने समय में और कितनी तीव्रता से बारिश होती है, यह अधिक महत्वपूर्ण होगा।
अगले कुछ दिन रहेंगे अहम
मुंबई में जलभराव, बिहार में बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका के बीच आने वाले 24 से 72 घंटे कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, सितंबर के मध्य में देश का मौसम एक बार फिर सक्रिय हो गया है—मुंबई में शहरी जलभराव, बिहार में व्यापक बाढ़ और पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा यह संकेत दे रहा है कि मानसून की विदाई से पहले भी कई राज्यों को मौसम की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।







