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करोड़ों की ठगी का मास्टरमाइंड राजीव साहू: कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के साथ फोटो वायरल, पीड़ितों में हड़कंप

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर,: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी टेंडर और मंत्रालयों में गाड़ियां लगवाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड राजीव कुमार साहू नामक एक शातिर बिचौलिया बताया जा रहा है। मामले में नया मोड़ तब आया जब राजीव साहू की कांग्रेस विधायक और युवा नेता देवेंद्र यादव के साथ एक फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस फोटो के सामने आने के बाद ठगी के शिकार हुए दर्जनों वाहन मालिकों और भोले-भाले ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है, और वे अब राजनीतिक रसूख के चलते न्याय न मिलने की आशंका जता रहे हैं।
शातिर बिचौलिए का बुना हुआ जाल: मासूमों को भारी मुनाफे का झांसा
मिली जानकारी के अनुसार, राजीव कुमार साहू (पिता पुनीत राम साहू, निवासी बंगला पारा, मांडर, रायपुर) ने ग्रामीण और शहरी इलाकों के सीधे-साधे लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाने के लिए एक बेहद शातिर जाल बुना। आरोपी साहू खुद को एक रसूखदार व्यक्ति बताता था और दावा करता था कि उसकी बड़े अधिकारियों और सरकारी विभागों में सीधी पहुंच है। उसने वाहन स्वामियों को झांसा दिया कि वह उनकी गाड़ियों को मंत्रालय, महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों और अन्य सरकारी परियोजनाओं में अनुबंध (एग्रीमेंट) पर लगवा देगा।
  
इस फर्जी अनुबंध के बदले, उसने वाहन मालिकों को हर महीने मोटा और निश्चित किराया दिलवाने का लालच दिया। सरकारी काम और पक्की कमाई के झांसे में आकर कई लोग राजीव साहू की बातों में आ गए। पीड़ितों ने बिना ज्यादा सोचे-समझे अपने कीमती वाहन, जिनमें कमर्शियल गाड़ियां, लग्जरी फोर-व्हीलर्स जैसे ग्रैंड विटारा (CG 04 PC 7965) और भारी मशीनरी जैसे जेसीबी (JCB 3DX) शामिल हैं, किराएनामे के तहत राजीव साहू को सौंप दिए।
कब्जे में लेते ही शुरू हुआ असली खेल: फर्जी एग्रीमेंट और दूसरे राज्यों में सौदा
गाड़ियां अपने कब्जे में लेने के बाद राजीव कुमार साहू का असली और घिनौना खेल शुरू हुआ। उसने वाहन मालिकों को बिना बताए और उनकी सहमति के बिना, गाड़ियों के फर्जी कागजात तैयार करवाए। कुछ मामलों में, उसने शातिर तरीके से फर्जी इकरारनामे बनाकर गाड़ियों को अन्य व्यक्तियों के नाम पर बेच दिया। वहीं, कुछ गाड़ियों को भारी रकम ऐंठकर उत्तर प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों में गिरवी रख दिया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी साहू ने गाड़ियों का फास्टैग तक फाड़ दिया ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न हो सके, और उनका बीमा (इन्श्योरेंस) भी खत्म होने दिया। जब पीड़ितों को दाल में कुछ काला लगा और उन्होंने अपनी गाड़ियों की खोजबीन शुरू की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि उनकी गाड़ियां रायपुर में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मंझनपुर और अन्य दूरदराज इलाकों में किसी अज्ञात शोरूम या दूसरे व्यक्तियों के पास खड़ी हैं, जिनसे पीड़ितों का कोई संबंध ही नहीं था।
किराया बंद, गाड़ियां गायब और पीड़ितों को मिल रही धमकियां
शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ दिनों तक थोड़ा-बहुत किराया देने का नाटक करने के बाद, राजीव साहू ने किराया देना पूरी तरह बंद कर दिया। जब भी पीड़ित वाहन मालिक अपना किराया मांगते या अपनी गाड़ियां वापस मांगते, तो आरोपी टालमटोल करने लगता और नए-नए बहाने बनाने लगता।
हद तो तब हो गई जब साहू ने उल्टा पीड़ितों से पैसे लेने का झूठा दावा करना शुरू कर दिया। जब पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत करने की बात कही, तो आरोपी ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और बुरा अंजाम होने की सीधी धमकियां दे डालीं। राजनीतिक रसूख का हवाला देकर वह पीड़ितों को डराने-धमकाने लगा। कई पीड़ितों का लाखों रुपये का किराया बकाया है और उनकी गाड़ियां कहां और किस हालत में हैं, इसका कोई अता-पता नहीं है, जिससे वे गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में हैं।
प्रशासन के चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण, एफआईआर के लिए भटक रहे पीड़ित
इस पूरे फर्जीवाड़े में सबसे दर्दनाक और निराशाजनक पहलू यह है कि ठगी के शिकार हुए भोले-भाले ग्रामीण और वाहन मालिक न्याय पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। धंसी-धरसींवा और आसपास के इलाकों से आए पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी ग्रामीण) और विभिन्न पुलिस थानों के कई चक्कर काटे हैं।
लिखित शिकायतें और पुख्ता सबूत (आवेदन, फर्जी इकरारनामे) सौंपे जाने के बावजूद, पीड़ितों का आरोप है कि अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। एफआईआर दर्ज न होने के कारण आरोपी बेखौफ घूम रहा है और अन्य लोगों को अपना शिकार बना सकता है। प्रशासन की तरफ से कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलने के कारण पीड़ित आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं और उनका सिस्टम से भरोसा उठ रहा है।
देवेंद्र यादव के साथ फोटो वायरल: क्या राजनीतिक संरक्षण में चल रहा था खेल?
राजीव साहू की कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के साथ फोटो वायरल होने के बाद पीड़ितों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। वे अब खुले तौर पर आशंका जता रहे हैं कि आरोपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, यही वजह है कि पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रही है। यह फोटो अब इस पूरे घोटाले का एक अहम हिस्सा बन गई है और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है।
ठगी के शिकार सत्यनारायण सेन और अन्य वाहन मालिकों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि राजनीतिक दबाव को दरकिनार कर, राजीव कुमार साहू के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। पीड़ितों ने मांग की है कि दूसरे राज्यों में अवैध रूप से बेची या गिरवी रखी गई उनकी गाड़ियों को तत्काल जब्त कर उन्हें वापस लौटाया जाए ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को उनके जीवनभर की कमाई का साधन वापस मिल सके। वे अब एक निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग कर रहे हैं ताकि इस बड़े फर्जीवाड़े की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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