जांच टीम की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, लेनदेन के आरोपों तक सीमित रहने का दावा; जांच अधिकारी का पक्ष नहीं मिला
कुसमी/बाटा। प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद कुसमी जनपद पंचायत की ओर से ग्राम पंचायत बाटा में जांच टीम भेजी गई। जांच टीम ने गांव पहुंचकर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। हालांकि, जांच की प्रक्रिया को लेकर अब ग्रामीणों की ओर से कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जांच टीम ने बसंती का लिखित बयान मौके पर दर्ज किया। वहीं, मामले में जिन लोगों का पक्ष दर्ज किया जाना था, उनमें खुशबू नगेसिया भी शामिल थीं। आरोप है कि जांच के दौरान खुशबू नगेसिया मौके पर मौजूद नहीं थीं। इसके बावजूद उनके पति से उनका पक्ष लिखवाया गया और जांच प्रतिवेदन में खुशबू नगेसिया का पक्ष दर्ज करते हुए उनके पति के हस्ताक्षर कराए गए।

लेनदेन के आरोपों तक सीमित रही जांच?
ग्रामीणों का कहना है कि जांच टीम ने मुख्य रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित लेनदेन के आरोपों को लेकर पूछताछ की। हालांकि, पात्र हितग्राहियों के नाम कथित तौर पर सूची से हटाए जाने या उन्हें अपात्र किए जाने के आरोपों पर जांच में क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि शिकायत में पात्र हितग्राहियों के नाम हटाए जाने और अपात्र किए जाने जैसे आरोप भी शामिल थे, तो क्या इन बिंदुओं की भी जांच की गई? यदि जांच की गई तो इस संबंध में क्या निष्कर्ष सामने आया, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।
जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल
जांच को लेकर ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि जांच टीम ने किन-किन बिंदुओं को जांच के दायरे में लिया और किन आरोपों की जांच नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच का उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े सभी आरोपों की वास्तविकता सामने लाना था, तो प्रत्येक बिंदु पर जांच की जानी चाहिए थी।
वहीं, किसी संबंधित व्यक्ति की गैरमौजूदगी में उसके पति से कथित तौर पर उसका पक्ष लिखवाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में सभी संबंधित पक्षों के बयान उनकी मौजूदगी में दर्ज किए जाने चाहिए थे, ताकि जांच प्रक्रिया को लेकर किसी तरह की शंका न रहे।
जांच अधिकारी से पक्ष जानने का प्रयास, नहीं मिला जवाब
मामले में जांच टीम के प्रमुख ABO से जांच की प्रक्रिया और सामने आए आरोपों को लेकर उनका पक्ष जानने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया। बताया गया कि कई बार फोन किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में जांच अधिकारी का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
अब सवाल यह है कि जांच टीम ने प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े सभी आरोपों की बिंदुवार जांच की या नहीं। यदि कुछ आरोपों की जांच नहीं की गई है, तो केवल सीमित बिंदुओं पर की गई जांच के आधार पर तैयार प्रतिवेदन को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियां सामने आ रही हैं।
दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र और अपात्र किए गए हितग्राहियों, कथित तौर पर नाम काटे जाने तथा लेनदेन से जुड़े आरोपों सहित सभी बिंदुओं की निष्पक्ष और विस्तृत दोबारा जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर दस्तावेजों की जांच की जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
संवाददाता : युसूफ खान







