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धूल फांक रहीं दमकल गाड़ियां, आग लगने पर रामभरोसे रतनपुर!

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-फायर ब्रिगेड की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल, संकरी गलियों और पानी की कमी से बढ़ा खतरा

विमल सोनी/रतनपुर। धार्मिक, पौराणिक और पर्यटन नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाले रतनपुर शहर में अग्निशमन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई दमकल गाड़ियां और अग्निशमन संसाधन पर्याप्त रखरखाव एवं व्यवस्था के अभाव में अपनी वास्तविक उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहे हैं।

शहर में आगजनी की घटनाओं के दौरान समय पर दमकल की सुविधा नहीं मिलने, गाड़ियों में पर्याप्त पानी नहीं होने, उपकरणों की स्थिति और पुराने तथा घने इलाकों की संकरी गलियों में बड़ी दमकल गाड़ियों के पहुंचने में आने वाली दिक्कतों को लेकर लोगों में नाराजगी है।

हाल की आगजनी की घटनाओं ने खोली व्यवस्था की पोल

कुछ माह पहले सोनारपारा रतनपुर, ग्राम कर्रा और मेला ग्राउंड/मेला बाजार क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में दुकानों और घरों को नुकसान पहुंचा और प्रभावित परिवारों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद सुनील अग्रवाल और वार्ड क्रमांक 5 के पार्षद मनोज पाटले ने अग्निशमन व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। पार्षदों ने संबंधित व्यवस्था और अधिकारियों से सवाल करते हुए कहा कि शहरवासियों से टैक्स लिया जाता है, लेकिन आपात स्थिति में उन्हें मूलभूत सुरक्षा व्यवस्था का भरोसा नहीं मिल पा रहा है।

पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि अग्निशमन व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो नगर परिषद स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।

आग लगे तो कितनी तैयार है फायर ब्रिगेड?

स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रतनपुर के घने बाजार या किसी संकरी गली में अचानक भीषण आग लग जाए, तो दमकल की गाड़ियां कितनी जल्दी घटनास्थल तक पहुंच पाएंगी?

पुराने शहर के कई हिस्सों में सड़कें और गलियां संकरी हैं। ऐसे स्थानों पर बड़ी दमकल गाड़ियों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे इलाकों के लिए छोटी क्षमता वाली मिनी फायर टेंडर जैसी व्यवस्था की जरूरत है।

पानी और उपकरणों को लेकर भी शिकायतें

स्थानीय नागरिकों के मुताबिक कई बार आगजनी की स्थिति में दमकल की गाड़ी समय पर नहीं पहुंच पाती। इसके अलावा गाड़ियों में पानी की उपलब्धता, पाइप और अन्य अग्निशमन उपकरणों के रखरखाव को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं।

लोगों का कहना है कि यदि दमकल वाहन घटनास्थल पर पहुंच भी जाए, लेकिन पानी या आवश्यक उपकरण पर्याप्त स्थिति में न हों, तो आपातकाल में उसका उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है।

करोड़ों के बजट के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल

शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सरकारी स्तर पर बजट और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। रतनपुर से जुड़े कई गांव और आसपास के छोटे-बड़े इलाके भी आपात स्थिति में इसी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।

ऐसे में सवाल सिर्फ रतनपुर शहर का नहीं, बल्कि रतनपुर से जुड़े ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का भी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि संसाधनों की खरीद के बाद उनका नियमित रखरखाव, परीक्षण और आपातकालीन संचालन सुनिश्चित नहीं किया जाए, तो महंगे उपकरण भी केवल शोपीस बनकर रह जाते हैं।

त्योहारों के पहले बढ़ी चिंता

अब नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार सामने हैं। इन दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ती है, अस्थायी दुकानें और मेला क्षेत्र सक्रिय रहते हैं तथा आतिशबाजी के कारण आगजनी का जोखिम भी बढ़ सकता है।

ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या प्रशासन त्योहारों से पहले अग्निशमन व्यवस्था का मॉक ड्रिल, वाहनों की तकनीकी जांच, पानी की उपलब्धता, पाइप एवं उपकरणों की जांच और संकरी गलियों के लिए वैकल्पिक फायर रिस्पॉन्स प्लान तैयार करेगा?

जनता पूछ रही है—जवाबदेही किसकी?

स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि आपात स्थिति में जनता को अपनी सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास करना पड़ता है। कई बार निजी पानी टैंकरों की मदद से आग पर काबू पाने की नौबत आने की शिकायतें भी सामने आती हैं।

लोगों का कहना है कि आग लगने के बाद व्यवस्था बनाने के बजाय आग लगने से पहले तैयारी जरूरी है।

रतनपुर जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में मजबूत अग्निशमन व्यवस्था केवल शहरवासियों ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

अब प्रशासन से उम्मीद

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन त्योहारों से पहले रतनपुर की अग्निशमन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करेगा?

क्या दमकल वाहनों की फिटनेस, पानी की क्षमता, पंप, पाइप, उपकरण और कर्मचारियों की उपलब्धता की जांच होगी?

क्या संकरी गलियों और घने बाजारों के लिए वैकल्पिक अग्निशमन व्यवस्था बनाई जाएगी?

और सबसे अहम—अगर किसी बड़े हादसे के समय दमकल व्यवस्था विफल होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?

जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तैयार और तत्काल सक्रिय होने वाली अग्निशमन व्यवस्था चाहती है।

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