रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था और फॉरेंसिक साइंस की एक ऐतिहासिक सफलता सामने आई है। करीब दो साल पहले खमतराई थाना क्षेत्र में हुई एक अज्ञात महिला की निर्मम हत्या की गुत्थी को पुलिस ने फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सुलझा लिया है। इस पूरे अंधे कत्ल की पटकथा को बेनकाब करने में मृतका के नाखूनों में सुरक्षित रखे गए बायोलॉजिकल ट्रेस यानी जैविक साक्ष्यों ने निर्णायक भूमिका निभाई। घटना के समय ही पुलिस की सजगता से सुरक्षित किए गए इन साक्ष्यों और आधुनिक तकनीक से तैयार डीएनए प्रोफाइलिंग ने सालों बाद आरोपियों के चेहरे से नकाब हटा दिया। इस मामले में पुलिस ने डीएनए मिलान के बाद तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
खमतराई के ट्रांसपोर्ट नगर में हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
यह पूरा सनसनीखेज मामला 21 अगस्त 2024 का है, जब खमतराई थाना अंतर्गत ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में 40 वर्षीय लता साहू नामक महिला का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। अज्ञात अपराधियों ने बड़ी ही बेरहमी से महिला को मौत के घाट उतार दिया था और मौके से फरार हो गए थे। घटना के तुरंत बाद जब स्थानीय लोगों ने शव देखा, तो इलाके में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही खमतराई पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची थी। प्राथमिक दृश्य में यह साफ लग रहा था कि महिला ने अपनी जान बचाने के लिए हमलावरों से कड़ा संघर्ष किया था। उस दौरान मौके पर पुलिस को कोई ऐसा सीधा गवाह या सुराग नहीं मिला था, जिससे आरोपियों की तुरंत पहचान हो सके।
फॉरेंसिक टीम की सूझबूझ से सुरक्षित किए गए थे नाखूनों के जैविक अंश
घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने मृतका के शरीर और हाथों का सूक्ष्मता से परीक्षण किया। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने यह अनुमान लगाया कि हमले के दौरान महिला ने अपने बचाव में हमलावरों को खरोंचा होगा। इसी अंदेशे के तहत मृतका लता साहू के दोनों हाथों के नाखूनों की गहन जांच की गई। जांच में नाखूनों के नीचे किसी अज्ञात व्यक्ति की त्वचा और रक्त के जैविक अंश (Biological Traces) पाए गए। पुलिस ने बिना कोई देरी किए तुरंत उन साक्ष्यों को आधुनिक फोरेंसिक प्रोटोकॉल के तहत सील कर सुरक्षित करवा लिया। बाद में प्रयोगशाला में इन जैविक नमूनों की मदद से अज्ञात हत्यारों की एक सटीक डीएनए प्रोफाइल तैयार कर रिकॉर्ड में सुरक्षित रख ली गई।
2 साल तक सुलगती रही जांच, फिर मिला अहम सुराग
साल 2024 से लेकर 2026 तक पुलिस इस अंधी हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए लगातार प्रयासरत रही। दर्जनों संदिग्धों से पूछताछ की गई और पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन कोई ठोस कामयाबी हाथ नहीं लग रही थी। वर्ष 2026 में खमतराई पुलिस की विशेष टीम को इस मामले में गुप्त सूचना के आधार पर कुछ स्थानीय संदिग्धों के बारे में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पुलिस ने सूचना के आधार पर तीन संदिग्ध युवकों को चिन्हित किया और उनकी गतिविधियों पर गोपनीय तरीके से नजर रखनी शुरू की। संदेह पुख्ता होने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनके डीएनए सैंपल एकत्र किए।
डीएनए लैब से आई रिपोर्ट ने मुहर लगाई और सलाखों के पीछे पहुंचे तीन कातिल
संदिग्धों से लिए गए नए डीएनए सैंपल को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया, जहां 21 अगस्त 2024 को मृतका के नाखूनों से निकाले गए डीएनए प्रोफाइल के साथ इनका वैज्ञानिक मिलान कराया गया। जब फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आई, तो पुलिस का संदेह पूरी तरह सच साबित हुआ। पुलिस के मुताबिक, संदेही मनहरण सारंग, राजेश पाल उर्फ चोटी उर्फ राजू और राजू मंडल उर्फ बंगाली का डीएनए सैंपल मृतका लता साहू के नाखूनों से मिले बायोलॉजिकल ट्रेस से शत-प्रतिशत मैच कर गया। इस अचूक वैज्ञानिक सबूत के सामने आते ही तीनों आरोपी पूरी तरह घिर गए।
कड़ाई से पूछताछ में आरोपियों ने कबूला अपना जुर्म
डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद खमतराई पुलिस ने मनहरण सारंग, राजेश पाल और राजू मंडल से सख्त लहजे में पूछताछ शुरू की। जब पुलिस ने कातिलों के सामने उनके ही डीएनए मैच की फॉरेंसिक रिपोर्ट रखी, तो उनके पास भागने या झूठ बोलने का कोई रास्ता नहीं बचा। तीनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि 21 अगस्त 2024 की रात ट्रांसपोर्ट नगर में उन्होंने लता साहू को अकेला पाकर वारदात को अंजाम दिया था। घटना के दौरान महिला ने अपनी आखिरी सांस तक उनका मुकाबला किया था और इसी संघर्ष में हमलावरों के जैविक अंश महिला के नाखूनों में फंस गए थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जीत, रायपुर पुलिस की सरहाना
राजधानी रायपुर में घटित इस ऐतिहासिक घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, अगर साक्ष्य सही तरीके से सुरक्षित रखे जाएं तो कानून के हाथ से गुनहगार कभी नहीं बच सकते। दो साल पुराने लता साहू हत्याकांड का यह पर्दाफाश रायपुर पुलिस और फॉरेंसिक टीम के पेशेवर तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवार ने सालों बाद मिले इस न्याय पर संतोष व्यक्त किया है और पुलिस की फॉरेंसिक कार्यप्रणाली की सराहना की है।







