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दिव्य ज्योति के विशेष बच्चों के खेल मैदान पर निर्माण को लेकर उठे सवाल

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-25 वर्षों से दिव्यांग बच्चों के उपयोग में रही जमीन बचाने की गुहार, आवेदन के बाद भी कार्रवाई का इंतजार

-रात में निर्माण कार्य और ठेकेदार की कथित धमकी से बढ़ी चिंता, जिला प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल

कोरबा। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुरक्षित खेल मैदान को बचाने की मांग को लेकर रोटरी क्लब ऑफ कोरबा एवं इनर व्हील एजुकेशन सोसायटी, कोरबा द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष लगातार गुहार लगाई जा रही है, लेकिन करीब एक माह बीत जाने के बाद भी मामले में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

दिव्य ज्योति विशेष विद्यालय एवं छात्रावास, दिगापुर, कोरबा में स्थित भूमि का उपयोग पिछले करीब 25 वर्षों से 100 विशेष बच्चों—मूक-बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों—के खेल, शारीरिक व्यायाम एवं पुनर्वास गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इसी भूमि को अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित किए जाने की जानकारी मिलने पर संस्था एवं रोटरी क्लब ने इसे विशेष बच्चों के हित में सुरक्षित रखने की मांग की है।

इस संबंध में रोटरी क्लब ऑफ कोरबा द्वारा मंत्री श्री लखनलाल देवांगन को तथा इनर व्हील एजुकेशन सोसायटी द्वारा 11 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया गया। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस भूमि का उपयोग विशेष बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे खेल मैदान के रूप में ही सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

बताया गया कि आवेदन देने के बाद कलेक्टर द्वारा मामले को देखने और जानकारी देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि वे दो बार जिला कलेक्टर से मिलकर मामले में कार्रवाई का आग्रह भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला।

रात में निर्माण कार्य को लेकर भी उठ रहे सवाल

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार, खेल मैदान में निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार द्वारा कथित रूप से बच्चों एवं संस्था से जुड़े लोगों को धमकाया जा रहा है। आरोप है कि ठेकेदार ने कथित तौर पर कहा कि “तुमको जो करना है कर लो, मैं तो काम करूंगा।”

वहीं स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य दिन के बजाय रात के समय किया जा रहा है। इससे सवाल उठता है कि आखिर ऐसा कौन-सा कारण है कि निर्माण कार्य सामान्य रूप से दिन में न कर रात में किया जा रहा है? यदि भूमि का आवंटन एवं निर्माण पूरी तरह नियमसम्मत है तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

प्रशासन से कई सवाल

विशेष बच्चों के लिए वर्षों से उपयोग हो रही भूमि को लेकर अब कई गंभीर सवाल सामने हैं—

क्या इस भूमि का किसी अन्य प्रयोजन के लिए विधिवत आवंटन हुआ है?

यदि हुआ है तो क्या विशेष विद्यालय एवं बच्चों के हितों को ध्यान में रखा गया?

निर्माण की अनुमति किस विभाग ने दी?

क्या निर्माण कार्य का नक्शा एवं स्वीकृति उपलब्ध है?

रात में निर्माण कार्य किए जाने की अनुमति किसने दी?

संस्था की आपत्ति के बावजूद काम जारी रखने का आधार क्या है?

सबसे महत्वपूर्ण—क्या विशेष बच्चों के एकमात्र खेल मैदान की कीमत पर कोई अन्य निर्माण उचित है?

विशेष बच्चों के लिए खेल मैदान केवल खाली जमीन नहीं, बल्कि उनके शारीरिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और जब तक भूमि के उपयोग एवं निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट न हो, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाने पर विचार करे।

अब निगाह जिला प्रशासन पर है कि विशेष बच्चों के हित में दिए गए इन आवेदनों को गंभीरता से लिया जाता है या फिर वर्षों से इन बच्चों के लिए उपयोग हो रही जमीन पर निर्माण कार्य यूं ही जारी रहता है।

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