पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। बंगाल की शुभेंदु सरकार पश्चिम बंगाल का नाम बदलेगी। इसके लिए अगले सत्र में बिल लाएगी। बंगाल की बीजेपी सरकार जल्द विधानसभा में बिल पेश कर सकती है।
BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इसकी जानकारी 5 अक्टूबर को दी। उन्होंने कहा कि बिल विधानसभा के इसी सत्र में भी पेश किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल का नया नाम ‘पश्चिम बंग’ (PASCHIM BANGA) रखने का फैसला उसके इतिहास से जोड़ने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि अब बांग्ला या वेस्ट बंगाल जैसे नाम नहीं बोलने पड़ेंगे।
बता दें कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें 1999 में शुरू हुई थीं, जब ज्योति बसु की वाम मोर्चा सरकार ने राज्य का नया नाम ‘पश्चिम बंग’ रखने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था। इसके बाद यह बहस हुई कि राज्य का नाम बांग्ला रखा जाए या नहीं। लेफ्ट फ्रंट सरकार ने बाद में यह सुझाव भी स्वीकार किया और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा। इसका मुख्य तर्क औपनिवेशिक दौर के नाम से छुटकारा पाना था। हालांकि, इस प्रक्रिया को राजनीतिक सहमति नहीं मिली। केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
TMC के सत्ता में आने के कुछ समय बाद यह मुद्दा फिर उठा। ममता बनर्जी सरकार ने शुरुआत में पश्चिम बंग नाम का प्रस्ताव रखा था।सरकार का तर्क था कि राज्यों की अंग्रेजी वर्णमाला वाली सूची में पश्चिम बंगाल नीचे आता है। इसलिए राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को बोलने के लिए अक्सर इंतजार करना पड़ता है। सरकार ने इसे कथित प्रशासनिक नुकसान बताया था। 2011 में सर्वदलीय बैठक ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद वर्ष 2026 में भी ममता सरकार ने ज्य सरकार ने नाम बदलने की प्रक्रिया फिर शुरू की थी। उसने तीन नामों का प्रस्ताव दिया था—बांग्ला, बंगाल और बंगाल। 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से बांग्ला को एकमात्र नाम बनाने का प्रस्ताव पास किया। हालांकि एक बार फिर केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी।