नेकदिल इंसान मिलते हैं, यदाकदा ही सही,
जब कभी ऐसे लोग मिल जाएँ, वो भी कम नहीं।
हर राह मंज़िल तक ले जाए, ज़रूरी तो नहीं,
मुकम्मल कोशिश की जाए, वो भी कम नहीं।
हर दुआ रंग ला ही दे, ज़रूरी तो नहीं,
दिल से हाथ उठ जाएँ, वो भी कम नहीं।
हर मुस्कान के पीछे ख़ुशी हो, ज़रूरी तो नहीं,
किसी का हौसला बन जाएँ, वो भी कम नहीं।
हर रिश्ता उम्रभर निभ जाए, ज़रूरी तो नहीं,
कुछ पल दिल से निभ जाए, वो भी कम नहीं।
हर सपना हक़ीक़त बन जाए, ज़रूरी तो नहीं,
सपनों के लिए जीते रहें, वो भी कम नहीं।
हर ठोकर हार का पैग़ाम हो, ज़रूरी तो नहीं,
उससे कुछ सीख मिल जाए, वो भी कम नहीं।
हर बात ज़ुबाँ से कह दी जाए, ज़रूरी तो नहीं,
ख़ामोशियाँ समझ ली जाएँ, वो भी कम नहीं।
हर दिन एक-सा गुज़र जाए, ज़रूरी तो नहीं,
हर दिन कुछ नया सिखा जाए, वो भी कम नहीं।
हर किसी से जीत ही जाएँ, ज़रूरी तो नहीं,
ख़ुद से जीत लिया जाए, वो भी कम नहीं।
जीवन का हिसाब जब ऊपर वाला करेगा कभी,
यदि इंसानियत साथ रह जाए, वो भी कम नहीं।
✍️: राजकुमार सोनी, नया रायपुर







