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बार-बार ऐश डाइक टूटने, जल एवं मृदा प्रदूषण का मामला: संजय कुमार पटेल ने CECB अधिकारियों और संयंत्र प्रबंधन की संभावित मिलीभगत की उच्चस्तरीय जांच मांगी

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कोरबा, छत्तीसगढ़।
कोरबा निवासी शिकायतकर्ता संजय कुमार पटेल ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक WP260900187972 पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB), क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा द्वारा प्रस्तुत जवाब पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह मामला केवल पाड़ीमार ऐश डाइक के क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि राखयुक्त पानी के बहाव, संभावित जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति से भी जुड़ा है।
संजय कुमार पटेल का कहना है कि उनके पास ऐश डाइक के बार-बार टूटने और राखयुक्त पानी के बहाव से संबंधित कई वीडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं। उनका आरोप है कि इन साक्ष्यों की समुचित जांच किए बिना विभाग द्वारा प्रस्तुत जवाब में निरीक्षण के समय राख का बहाव नहीं पाए जाने की बात कही गई है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि ऐश डाइक के आसपास रेनकट्स मौजूद थे और ढेंगूरनाला की तलहटी में राख का जमाव भी मिला, तो राख के वास्तविक बहाव, उसकी मात्रा तथा उससे हुए पर्यावरणीय नुकसान की व्यापक जांच क्यों नहीं की गई?
CECB की रिपोर्ट के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को पाड़ीमार ऐश डाइक के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में, ढेंगूरनाला की ओर, रेनकट्स पाए गए थे। रिपोर्ट में नाले की तलहटी में राख के जमाव का भी उल्लेख है, जिसे पूर्व में राख के बहाव का संकेत माना गया। इसके बाद संयंत्र प्रबंधन को 30 सितंबर 2026 के पत्र के माध्यम से ऐश डाइक के बांध को मजबूत करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश दिए गए।
शिकायतकर्ता ने विभागीय जवाब की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि वीडियो साक्ष्यों और निरीक्षण रिपोर्ट का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए। उनके अनुसार, केवल निरीक्षण के समय राख का बहाव नहीं दिखना इस बात का पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि पूर्व में राखयुक्त पानी का बहाव नहीं हुआ अथवा पर्यावरणीय क्षति नहीं पहुंची।
जल प्रदूषण और मृदा प्रदूषण की भी हो जांच
संजय कुमार पटेल ने कहा कि फ्लाई ऐश के बहाव से संभावित रूप से प्रभावित नाले, आसपास की भूमि और संबंधित जल स्रोतों की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। पानी एवं मिट्टी के नमूने सक्षम प्रयोगशाला से जांचे जाएं, राख के जमाव का क्षेत्र और मात्रा निर्धारित की जाए तथा पर्यावरणीय क्षति का आकलन किया जाए। यदि राखयुक्त पानी हसदेव नदी या उससे जुड़े जल स्रोतों तक पहुंचा है, तो उसकी भी स्वतंत्र पुष्टि कराई जानी चाहिए।
उन्होंने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धाराओं 24, 25 और 33A तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। जल अधिनियम की धारा 24 प्रदूषणकारी पदार्थों को जलधाराओं में छोड़ने पर प्रतिबंध से, धारा 25 नए आउटलेट एवं डिस्चार्ज पर नियंत्रण से और धारा 33A बोर्ड की निर्देश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
CECB अधिकारियों और संयंत्र प्रबंधन की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय अधिकारी, कोरबा, संबंधित निरीक्षण अधिकारियों तथा संयंत्र प्रबंधन की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने संभावित मिलीभगत की आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बार-बार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद प्रभावी रोकथाम, पर्यावरणीय क्षति का आकलन और जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने मांग की है कि जांच किसी ऐसे स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी या तकनीकी एजेंसी से कराई जाए जो संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय की जांच प्रक्रिया से बाहर हो। निरीक्षण रिपोर्ट, संबंधित पत्राचार, उपलब्ध वीडियो साक्ष्य तथा पूर्व की शिकायतों और कार्रवाई के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाए।
यदि जांच में जानबूझकर तथ्य छिपाने, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर करने, गलत जानकारी देने या अन्य किसी कानूनी उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानून के अनुसार विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाए। संबंधित लोक सेवकों की जवाबदेही के संदर्भ में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 198 सहित किसी भी प्रावधान का प्रयोग तभी किया जाए, जब उसके आवश्यक कानूनी तत्व साक्ष्यों से स्थापित हों।
संजय कुमार पटेल ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण मंडल की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद सुधारात्मक निर्देश जारी करना नहीं, बल्कि प्रदूषण की रोकथाम, पर्यावरणीय प्रभावों का निष्पक्ष आकलन और कानून का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने राज्य शासन एवं सक्षम प्राधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और शिकायत पर की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
जारीकर्ता:
संजय कुमार पटेल
 राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस( इंटक) जिला सचिव कोरबा छत्तीसगढ़
शिकायतकर्ता
कोरबा, छत्तीसगढ़

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