ज़िंदगी के कितने हैं तराने,
कितने हैं इसके अफ़साने…
किसी ने भी कहाँ ये जाने,
कितने रंग हैं इसके दिखाने।
ज़िंदगी भी क्या-क्या रंग दिखाती है,
कभी हँसाती, कभी रुलाती है।
कभी धूप तो कभी छाँव देती,
हर मोड़ पर नई राह दिखाती है।
वक़्त किसी के लिए रुकता नहीं,
इसके अपने हैं ताने-बाने।
आज जो पास, वही कल दूर हो,
किसने जाने किसके क्या बहाने।
जो पल मिला, उसे जी भर जी लो,
फिर ये पल नहीं आने।
कल की चिंता छोड़ो मन से,
आज के पल मुस्काने।
राहों में कितने मोड़ मिलेंगे,
किसने पहले ये सब जाने।
कुछ सपने पूरे हो जाते,
कुछ रह जाते हैं अधूरे फ़साने।
कुछ रिश्ते जीवन भर चलते,
कुछ बन जाते बीते ज़माने।
कुछ चेहरे दिल में बस जाते,
कुछ मिलकर भी लगते बेगाने।
कहाँ से आए, कहाँ जाना है,
ये किसने जाना है।
जीवन तो बस एक सफ़र है,
चलते ही जाना है।
न होंगे जब हम, सिर्फ़ यादें होंगी,
कल किसने देखा, अजीब फ़साना है।
जो मिला, उसे अपना मानो,
बाकी सब तो आना-जाना है।
जब तक साँसें साथ हैं अपनी,
हर पल को हँसकर बिताना है।
प्रेम बाँटो, खुशियाँ बाँटो,
यही जीवन का सच्चा ख़ज़ाना है।
ज़िंदगी के कितने हैं तराने,
कितने हैं इसके अफ़साने…
किसी ने भी कहाँ ये जाने—
बस जीते जाओ… अपने फ़साने!
✍️ : राजकुमार सोनी, नया रायपुर







