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नवंबर माह में किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की विशेष सलाह, रबी फसलों की बुवाई से लेकर सब्जियों की खेती तक बताए जरूरी उपाय

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संयुक्त जन जागरूकता अभियान के माध्यम से किसानों को किया जा रहा जागरूक, उन्नत खेती और फसल सुरक्षा के लिए जारी की गई महत्वपूर्ण कृषि सलाह

पामगढ़। रबी फसलों की बुवाई और आगामी कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त जन जागरूकता अभियान के तहत किसानों के हित में नवंबर माह के लिए विशेष कृषि सलाह जारी की गई है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान समाजसेवी स्व. हिंच्छाराम खरे, स्व. गणेशराम खरे तथा महान देहदानी स्व. मनोज कुमार खरे की स्मृति में संचालित इस अभियान के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन, बीज उपचार और कीट एवं रोग नियंत्रण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे (सस्य विज्ञान) एवं जितेंद्र कुमार खरे, प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी ने किसानों को नवंबर माह में किए जाने वाले प्रमुख कृषि कार्यों की जानकारी देते हुए कहा है कि समय पर बुवाई, उचित बीज उपचार और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

नवंबर माह में किसानों के लिए प्रमुख कृषि सलाह

1. रबी फसलों के लिए खेत तैयार करें: किसानों को सलाह दी गई है कि खाली खेतों में ट्रैक्टर चलित रोटावेटर अथवा कल्टीवेटर से उथली जुताई कर खेत को आगामी फसलों की बुवाई के लिए तैयार करें। इस मौसम में मूंग, उड़द, खेसरी, चना, कुसुम, सूरजमुखी, अलसी एवं चारे वाली फसलों की बुवाई की जा सकती है।

2. समय पर करें दलहन एवं तिलहन की बुवाई: रबी मौसम की दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुवाई 15 नवंबर के आसपास पूरी कर लेने की सलाह दी गई है। समय पर बुवाई करने से फसलों में कीट एवं व्याधियों के प्रकोप को कम करने में मदद मिलती है।

3. चने की बुवाई से पहले बीजोपचार जरूरी: चने की फसल में रोगों से बचाव के लिए बीजोपचार को अनिवार्य बताया गया है। इसके लिए कार्बेन्डाजिम 1.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से तथा राइजोबियम एवं ट्राइकोडर्मा कल्चर का अनुशंसित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी गई है। ट्राइकोडर्मा की मात्रा 6 से 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज बताई गई है। किसानों को दवाओं एवं जैविक कल्चर के उपयोग में उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए।

4. चने की फसल में फसल चक्र अपनाएं: जिन खेतों में प्रतिवर्ष उकठा एवं कॉलर रॉट बीमारी का प्रकोप होता है, वहां चने की लगातार खेती करने से बचने की सलाह दी गई है। ऐसे खेतों में गेहूं, तिवड़ा, कुसुम एवं अलसी जैसी वैकल्पिक फसलें लगाकर फसल चक्र अपनाना लाभकारी हो सकता है।

5. केले की फसल में मिट्टी चढ़ाएं: केला उत्पादक किसान पौधों की मजबूती और बेहतर विकास के लिए फसल में मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें।

6. पपीते की फसल में रोग प्रबंधन पर ध्यान दें: पपीते की फसल को रोगों से बचाने के लिए प्रत्येक 15 दिन के अंतराल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के छिड़काव की सलाह दी गई है। इसका प्रयोग स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा एवं उत्पाद के लेबल के अनुसार ही करें।

7. गोभीवर्गीय सब्जियों की नर्सरी तैयार करें: शीतकालीन सब्जियों की खेती करने वाले किसान फूलगोभी एवं पत्तागोभी की अगेती किस्मों का चयन कर नर्सरी तैयार करें, ताकि समय पर पौधों का रोपण किया जा सके।

8. टमाटर, बैंगन और मिर्च की खेती की तैयारी करें: टमाटर, बैंगन, मिर्च एवं शिमला मिर्च की खेती करने वाले किसान अभी से खेत और पौध तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करें। बुवाई से पहले बीजों को थायरम 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करने की सलाह दी गई है।

9. बरसीम एवं जई की बुवाई करें: पशुपालक एवं चारा उत्पादक किसान नवंबर माह के मध्य तक बरसीम और जई की बुवाई कर लें, जिससे पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण हरा चारा उपलब्ध हो सके।

10. मोगरा की फसल में उचित प्रबंधन करें: मोगरा में कटाई-छंटाई के बाद खाद एवं उर्वरकों का समुचित प्रबंधन करें, जिससे पौधों की वृद्धि और उत्पादन बेहतर हो सके।

कृषि कार्यों के दौरान सुरक्षा का रखें विशेष ध्यान

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती के दौरान सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने की अपील की है। कृषि यंत्रों का संचालन करते समय पूरी सावधानी बरतें। धान की कटाई के दौरान आंखों को धूल, भूसे और अन्य कणों से बचाने के लिए सुरक्षा चश्मा पहनें तथा उपलब्ध होने पर एप्रन का उपयोग करें। सुरक्षित कृषि कार्य अपनाकर दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।

मोबाइल एप से भी प्राप्त करें कृषि संबंधी जानकारी

किसानों को तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से क्रॉप डॉक्टर, राइस आईएफसी और हर्बकेल-हर्बिसाइड कैलकुलेटर जैसे कृषि उपयोगी मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने की सलाह दी गई है। इन एप के माध्यम से किसान फसलों की समस्याओं, कृषि संबंधी जानकारियों और खरपतवारनाशक के उपयोग से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

किसानों की सेवा और जागरूकता ही अभियान का उद्देश्य

संयुक्त जन जागरूकता अभियान के पदाधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक एवं उपयोगी कृषि जानकारी पहुंचाना, खेती की लागत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के प्रति जागरूक करना तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस अभियान में डॉ. चंद्रशेखर खरे, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं प्रक्षेत्र प्रबंधक, शोध विद्वान (सस्य विज्ञान), कृषि विज्ञान केंद्र, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर; धर्मेन्द्र कुमार खरे, निदेशक एवं प्रमुख, संयुक्त जन जागरूकता अभियान, पामगढ़; जितेंद्र कुमार खरे, प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी तथा सुमन खरे, वरिष्ठ समाजसेविका का विशेष योगदान है।

अभियान के माध्यम से किसानों से अपील की गई है कि वे खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं और किसी भी फसल में रोग या कीट की समस्या आने पर विशेषज्ञों से सलाह लें। अधिक एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

कृषक जनहित एवं समाजहित में जारी यह अभियान किसानों को जागरूक, आत्मनिर्भर और उन्नत कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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