सारंगढ़ संवाददाता – अशोक मनहर
48 घंटे तक जंगल में पड़ा रहा तेंदुए का शव, पहले करंट का शिकारी जाल मिला, जंगल कटाई और आगजनी के मामले भी उठे—मीडिया लगातार सवाल उठा रहा, फिर भी उच्च अधिकारी मौन क्यों?
बिलाईगढ़। बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र में लगभग 12 वर्षीय तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धाराशिव बीट के कक्ष क्रमांक 446 में तेंदुए का शव मिलने की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि शव लगभग 48 घंटे तक जंगल में पड़ा रहा। अब सवाल सीधे वन परिक्षेत्र अधिकारी माखनलाल बंजारे की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं।
रेंजर माखनलाल बंजारे लगातार जंगल में गश्त और निगरानी होने की बात कहते हैं, तो फिर सवाल है कि नियमित गश्त के बावजूद तेंदुए की मौत की जानकारी विभाग को दो दिनों तक क्यों नहीं मिली? क्या जंगल की निगरानी वास्तव में हो रही है या फिर गश्त सिर्फ कागजों और बयानों तक सीमित है?
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिलाईगढ़ रेंज में जंगल कटाई, जंगल में आगजनी और वन्यजीवों के शिकार की आशंकाओं से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। भटगांव बीट में रात के अंधेरे में हाई-वोल्टेज करंट का शिकारी जाल मिलने पर मीडिया को खुद जंगल पहुंचकर उसे हटाना पड़ा था और साक्ष्य रेंजर माखनलाल बंजारे की टेबल पर प्रस्तुत किए गए थे। लेकिन उस मामले में भी आज तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जब माखनलाल बंजारे बिलाईगढ़ रेंज में पदस्थ नहीं थे, तब क्षेत्र की व्यवस्था को लेकर ऐसी लगातार शिकायतें सामने नहीं आती थीं। अब एक के बाद एक घटनाएं सामने आने के बावजूद जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही है?
तेंदुए की मौत के मामले में डॉग स्क्वायड की टीम जांच कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ घरों और खेतों तक खोजी कुत्ते पहुंचे तथा खेत में संदिग्ध हथियार मिलने की चर्चा है। शिकार की आशंका भी जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
*अब सवाल वन मंडल के उच्च अधिकारियों से है—आखिर माखनलाल बंजारे पर कार्रवाई कब होगी? मीडिया लगातार मामले उजागर कर रहा है, साक्ष्य भी सामने रखे जा चुके हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? क्या रेंजर को किसी का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते हर बार मामला सामने आने के बाद भी जवाबदेही तय नहीं होती?*
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल निष्पक्ष जांच कराएं। रेंजर की गश्त व्यवस्था, बीट निरीक्षण, जंगल कटाई, आगजनी और पूर्व के शिकार संबंधी मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय करें। लापरवाही प्रमाणित होने पर माखनलाल बंजारे के खिलाफ तत्काल कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।
*आखिर वन्यजीवों की मौत और जंगल की सुरक्षा में लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? क्या अब भी उच्च अधिकारी चुप रहेंगे या इस बार रेंजर माखनलाल बंजारे की जवाबदेही तय होगी?*







