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सक्ती वेदांता प्लांट हादसा:- श्रमिकों की दर्दनाक मौत पर जनआक्रोश, सुरक्षा में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई व उच्च स्तरीय जांच की मांग- दादा तुलेश्वर हिरा सिंह मरकाम।

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कोरबा:-छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित के वेदांता पावर प्लांट में घटित भीषण हादसे में अब तक 17 श्रमिकों की असमय मृत्यु की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। कई अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं और जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी है जिसने पूरे क्षेत्र को शोक, भय और आक्रोश से भर दिया है।
मैं इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करत हूँ। शोकाकुल परिवारों के दर्द को शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। जिन परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए, उनके सामने आज जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी जनआक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों एवं श्रमिक संगठनों में यह भावना स्पष्ट रूप से देखी जा रही है कि प्लांट प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी, मशीनों के रख-रखाव में लापरवाही एवं समय-समय पर आवश्यक निरीक्षणों की कमी इस हादसे के प्रमुख कारण हो सकते हैं।औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, परंतु इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि,सुरक्षा उपकरणों एवं SOP (Standard Operating Procedures) का समुचित पालन नहीं किया जा रहा था,मशीनों एवं बॉयलर/प्रेशर सिस्टम के नियमित मेंटेनेंस एवं ऑडिट में गंभीर खामियां रही हैं।,प्लांट में कार्यरत श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण एवं सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए।यह भी गंभीर जांच का विषय है कि संबंधित निरीक्षण करने वाले विभागों—जैसे औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग, विद्युत निरीक्षण विभाग तथा पर्यावरण विभाग—द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षण कितने प्रभावी थे। साथ ही, प्लांट को जारी किए गए स्वीकृतियां किन शर्तों के आधार पर प्रदान किए गए थे और क्या उन शर्तों का पालन वास्तव में किया जा रहा था या नहीं।
अतः मैं राज्य सरकार एवं प्रशासन से निम्नलिखित मांग करता हूं
1. इस पूरे प्रकरण की न्यायिक या उच्च स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. हादसे के वास्तविक कारणों—तकनीकी विफलता, मानवीय त्रुटि या प्रबंधन की लापरवाही—की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
3. सभी घायलों का सर्वोत्तम एवं निःशुल्क उपचार कराया जाए तथा उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार वहन करे।
4. प्लांट प्रबंधन, ठेकेदारों एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
5. संबंधित निरीक्षण विभागों की भूमिका की भी जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई।
6. प्रदेश के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए एवं सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
यह हादसा एक चेतावनी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी और भी घटनाएं हो सकती हैं। श्रमिकों का जीवन किसी भी औद्योगिक उत्पादन से अधिक मूल्यवान है और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।मैं प्रशासन से आग्रह करता हूँ कि पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए तथा दोषियों को कठोर दंड देकर एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराई न जाए।

विधायक, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP)

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