संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
पक्षकारों को त्वरित, सुलभ और आपसी सहमति से न्याय दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल
जिला बिलासपुर बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्ष 2026 की दूसरी नेशनल लोक अदालत का जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली से वर्चुअल शुभारंभ कर न्याय व्यवस्था को और अधिक जनहितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। इस अवसर पर प्रदेश के 23 जिलों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया।

माननीय मुख्य न्यायाधीश ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम जनता के लिए न्याय पाने का एक सरल, त्वरित और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक पुराने एवं लंबित मामलों का निराकरण कर लोगों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराया जाए। उनके वक्तव्य में न्यायपालिका की संवेदनशीलता और जनकल्याण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मुंगेली जिला न्यायालय में गठित विभिन्न खंडपीठों का निरीक्षण किया तथा हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए। उन्होंने बैंक, बीमा एवं नगर निगम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण में सहयोग देने का संदेश दिया। यह पहल केवल न्यायिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हुई।
उच्च न्यायालय बिलासपुर में भी नेशनल लोक अदालत को लेकर विशेष गतिविधियां संचालित की गईं। माननीय पीठासीन न्यायाधीशों ने लोक अदालत की कार्यवाही का जायजा लिया तथा प्रकरणों के निराकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इससे न्यायालयीन व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और जनविश्वास को नई मजबूती मिली।

राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से छत्तीसगढ़ में लाखों लोगों को राहत मिली। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल 64,72,606 प्रकरणों का सफल निराकरण करते हुए लगभग 36,24,58,69,436 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि लोक अदालतें आज न्याय व्यवस्था का एक सशक्त और प्रभावशाली विकल्प बन चुकी हैं, जहां बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के आपसी सहमति से विवादों का समाधान संभव हो रहा है।
विशेष बात यह रही कि मार्च माह में लोक अदालत आयोजित होने के बावजूद कम अंतराल में पुनः इतने बड़े स्तर पर मामलों का निपटारा किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका आम नागरिकों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए निरंतर सक्रिय और प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से गरीब, मजदूर, ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं है।

कार्यक्रम के अंत में माननीय मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायाधीशों, पीठासीन अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं हितग्राहियों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायपालिका और समाज के बीच विश्वास का मजबूत सेतु है। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आपसी सुलह और त्वरित न्याय की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है, जिससे आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।








