संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
समय पर इलाज से बची बच्चों की आंखों की रोशनी, डॉक्टरों की तत्परता की हो रही सराहना
जिला बिलासपुर बिलासपुर। बिल्हा क्षेत्र के बटोरी गांव में आवारा कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए दो मासूम बच्चों का छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में सफल उपचार किया गया। नेत्र रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम ने जटिल पलक सर्जरी कर दोनों बच्चों की आंखों की रोशनी सुरक्षित रखने में बड़ी सफलता हासिल की है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है, वहीं सिम्स के चिकित्सकों की तत्परता और कुशल उपचार की सराहना की जा रही है।
जानकारी के अनुसार बिल्हा क्षेत्र अंतर्गत बटोरी गांव में एक आवारा कुत्ते ने दो वर्षीय बालक एवं दो वर्षीय बालिका पर हमला कर दिया। हमले में दोनों बच्चों के चेहरे, आंखों और पलकों पर गंभीर चोटें आईं। परिजन तत्काल बच्चों को सिम्स बिलासपुर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तुरंत उपचार प्रारंभ किया।
चिकित्सकों ने बताया कि यह मामला “कैटेगरी-3 डॉग बाइट” का था, जिसमें रेबीज संक्रमण का खतरा अत्यधिक रहता है। अस्पताल पहुंचते ही बच्चों के घावों की गहन सफाई की गई तथा तत्काल एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) शुरू की गई। संक्रमण रोकने के लिए रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी लगाया गया।

बच्चों की आंखों की पलकों पर गंभीर चोट होने के कारण उसी दिन नेत्र रोग विभाग के ऑपरेशन थिएटर में “अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी” की गई। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त ऊतकों की सावधानीपूर्वक मरम्मत कर आंखों की संरचना और दृष्टि को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया। वर्तमान में दोनों बच्चों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वे चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
इस जटिल सर्जरी में डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. आरती, डॉ. अनिकेत सहित निश्चेतना विभाग से डॉ. यशा तिवारी एवं डॉ. द्रोपती तथा नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि गंभीर और आपातकालीन मरीजों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानवर के काटने या खरोंच लगने पर तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लें।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने कहा कि रेबीज एक जानलेवा लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर वैक्सीन और उपचार मिलने से मरीज को सुरक्षित बचाया जा सकता है।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह ने बताया कि बच्चों की आंखों और पलकों पर गंभीर चोटें थीं, जिसके कारण तत्काल सर्जरी आवश्यक थी। विशेषज्ञ टीम के प्रयास से बच्चों की दृष्टि सुरक्षित रखने में सफलता मिली।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नगर निगम एवं प्रशासन से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने, नसबंदी एवं टीकाकरण कार्यक्रम तेज करने तथा रेबीज जागरूकता अभियान संचालित करने की मांग की है।








