कुसमुंडा संवाददाता – गुरदीप सिंह
आज 12 मई 2026 को ‘राष्ट्रीय मांग दिवस’ के देशव्यापी आह्वान पर, SECL कुसमुंडा क्षेत्र के संयुक्त श्रमिक संगठनों (AITUC, HMS, INTUC, CITU) ने एकजुट होकर श्रमिकों की लंबित मांगों के निराकरण हेतु क्षेत्रीय महाप्रबंधक के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार को एक ज्ञापन प्रेषित किया।
इस अवसर पर श्रमिक नेताओं ने कोयलांचल और औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत संविदा व नियमित श्रमिकों की ज्वलंत समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में श्रमिकों के अधिकारों का हनन और महंगाई की मार उनके जीवन को संकट में डाल रही है।
ज्ञापन की मुख्य मांगें:
1. वेतन वृद्धि: बढ़ती महंगाई को देखते हुए सभी श्रेणी के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह निर्धारित किया जाए।
2. नियमितीकरण: संविदा (ठेका) प्रथा को समाप्त कर कार्यरत श्रमिकों का नियमितीकरण हो और ‘समान कार्य-समान वेतन’ का नियम कड़ाई से लागू हो।
3. श्रम कानूनों की बहाली: नए ‘लेबर कोड’ को तुरंत वापस लेकर पुराने सुरक्षात्मक श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।
4. कार्यस्थल सुरक्षा: 8 घंटे का कार्यदिवस कड़ाई से लागू हो, ओवर टाइम का डबल भुगतान मिले और सुरक्षा के वैश्विक मानक अपनाए जाएं।
5. महंगाई पर लगाम: रसोई गैस (LPG) और खाद्य सामग्री की कीमतों को तत्काल कम कर आम जनता को राहत दी जाए।
6. लोकतांत्रिक अधिकार: ट्रेड यूनियन नेताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए और दमनकारी कार्रवाई बंद हो।

प्रमुख उपस्थिति:
कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य रूप से एटक (AITUC) के क्षेत्रीय अध्यक्ष मुकेश साहू, एचएमएस (HMS) के क्षेत्रीय महामंत्री अशोक कुमार साहू, इंटक (INTUC) के क्षेत्रीय महामंत्री राजू लाल सोनी और सीटू (CITU) के क्षेत्रीय महामंत्री साजी टी जॉन ने किया।
HMS संगठन की ओर से मनीष सिंह, निरंजन सिंह, अनंत त्रिपाठी, श्रवण कुमार, सोनू प्रताप, रामेश्वर वैष्णव, विकास पाठक, पंकज द्विवेदी, अभिषेक मिश्रा, अभय अनुराग, शशिकांत गर्ग, सुमंत कुमार, विजय विश्वकर्मा, मनीष मुर्मू, युवराज गुप्ता सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वहीं एटक की ओर से के.के. गवेल और संजय पाल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीटू से समर सिंह चौहान, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, प्रेमपाल संडीले, आईपी केसरवानी, शिशुपाल सिंह मौजूद रहे
श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इन लोकतांत्रिक मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।








