Home चर्चा में खाद वितरण के लिए राज्य शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

खाद वितरण के लिए राज्य शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

9
0
रिपोर्ट- खिलेश साहू
कृषकों को समय पर एवं समानुपातिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की पहल
संतुलित उर्वरक उपयोग, लागत में कमी और भूमि उर्वरा संरक्षण पर विशेष जोर
राज्य शासन द्वारा आगामी खरीफ वर्ष 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित सतत कृषि विकास एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इसके तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद एवं नीलहरित काई जैसे वैकल्पिक उपायों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान तनावपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए राज्य शासन ने सभी कृषकों को समय पर और समानुपातिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु विशेष रणनीति तैयार की है। शासन का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना, कृषि लागत को कम करना तथा उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकना है।
  जारी निर्देशों के अनुसार खरीफ 2025 में कृषकों को वितरित यूरिया की 80 प्रतिशत मात्रा तथा डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा ही खरीफ 2026 में प्रारंभिक रूप से वितरित की जाएगी। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा पारंपरिक यूरिया उपलब्ध होने पर दी जाएगी, अन्यथा नैनो यूरिया के रूप में प्रदाय की जाएगी। इसी प्रकार डीएपी की शेष मात्रा उपलब्धता के आधार पर प्रदान की जाएगी।
  राज्य शासन ने बड़े कृषकों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। जिन कृषकों की भूमि धारिता 5 एकड़ से अधिक है, उन्हें निर्धारित मात्रा के अनुसार यूरिया तीन किश्तों में वितरित किया जाएगा। दूसरी किश्त पहली किश्त के 20 दिवस बाद तथा तीसरी किश्त दूसरी किश्त के 20 दिवस बाद दी जाएगी। इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा तथा अनावश्यक भंडारण एवं दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
 निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि उर्वरक वितरण की गणना बोरी के आधार पर की जाएगी। खरीफ 2025 में वितरित उर्वरक की कुल बोरी संख्या के आधार पर ही खरीफ 2026 की पात्रता तय होगी। यदि गणना में दशमलव संख्या प्राप्त होती है तो निकटतम पूर्णांक को मान्य किया जाएगा। उदाहरणस्वरूप 7.2 बोरी होने पर 7 बोरी तथा 7.8 होने पर 8 बोरी स्वीकृत मानी जाएगी।
  कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें तथा कृषकों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करें। सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरकों के पारदर्शी वितरण, नियमित मॉनिटरिंग एवं पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
   राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें तथा जैविक एवं वैकल्पिक पोषक तत्व प्रबंधन उपायों को अपनाकर भूमि की उर्वरा शक्ति को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here