बतौली संवाददाता – वीरेंद्र तिवारी
सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सेदम में 16 मई 2026 को जो हुआ, उसने पूरे गांव को दहला कर रख दिया। विवादों में घिरे पुल निर्माण स्थल के पास अचानक एक नया ट्रैक्टर बेलगाम रफ्तार में सड़क पर दौड़ पड़ा और कुछ ही सेकंड में वहां चीख-पुकार, भगदड़ और दहशत का माहौल बन गया। मौके पर काम कर रहे महिला और पुरुष मजदूर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि लोग समय रहते नहीं भागते, तो कई लोगों की जान जा सकती थी।
घटना में एक ग्रामीण घायल हो गया, जबकि कई मजदूर बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में डर और गुस्से का माहौल फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर जिस तरह भीड़भाड़ और निर्माण स्थल के बीच तेज रफ्तार में दौड़ा, उसने कुछ पलों के लिए पूरे इलाके की सांसें रोक दी थीं। लोगों के मुताबिक ट्रैक्टर मानो “यमदूत” बनकर सड़क पर दौड़ रहा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जहां निर्माण कार्य चल रहा था, वहां न कोई सूचना पटल लगाया गया था, न चेतावनी बोर्ड और न ही मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम किया गया था। खुलेआम नियमों और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 5 वर्षों से अधूरा पड़ा पुल निर्माण कार्य शिकायतों के बाद दोबारा शुरू किया गया, लेकिन काम शुरू होते ही गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों को नजरअंदाज कर दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि संबंधित ट्रैक्टर पुल निर्माण में सीधे काम नहीं कर रहा था, लेकिन निर्माण स्थल और मजदूरों की भीड़ के बीच उसे बेहद लापरवाही से चलाया जा रहा था। अचानक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ पड़ा और वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। मजदूर जान बचाने के लिए भागते नजर आए। कुछ महिलाएं डर के कारण चीखने लगीं और मौके पर अफरा-तफरी फैल गई।
घटना के बाद ग्रामीणों की सूचना पर ट्रैक्टर को थाना बतौली ले जाया गया। लेकिन इसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। गांव में चर्चा है कि मामला बढ़ता देख सरपंच अपने बचाव में सक्रिय हो गया और समझौते के जरिए पूरे घटनाक्रम को दबाने की कोशिश शुरू कर दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे की गंभीरता और लोगों की सुरक्षा से ज्यादा चिंता अपनी जिम्मेदारी बचाने की की गई।
ग्रामीणों ने ट्रैक्टर मालिक संतोष पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि भारी वाहन को लापरवाही से भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में चलाया गया, जिससे मजदूरों की जान खतरे में पड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उस समय मजदूर भागकर अपनी जान नहीं बचाते, तो गांव में कई परिवारों के घर मातम में बदल जाते।
अब पूरे गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर बिना सुरक्षा व्यवस्था, बिना सूचना पटल और नियमों की अनदेखी के बीच यह निर्माण कार्य किसके संरक्षण में चल रहा था। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच और जिम्मेदार लोगों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि अब भी सख्ती नहीं हुई, तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।








