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अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर बड़ी सहमति: 19 जून को होगा समझौते पर हस्ताक्षर, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा

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107 दिनों के संघर्ष के बाद शांति की दिशा में बड़ा कदम, वैश्विक तेल बाजार को राहत के संकेत
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। दोनों देशों ने युद्ध रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और आगे की बातचीत शुरू करने पर सहमति बना ली है। इस प्रारंभिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों ने राहत की सांस ली।

ट्रम्प का ऐलान: “जहाजों के इंजन चालू करो, तेल को बहने दो”
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन दोबारा शुरू किया जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध भी हटाया जाएगा। ट्रम्प ने दुनिया भर के जहाजों को संदेश देते हुए कहा, “Ships of the World, start your engines. Let the oil flow.” 

पाकिस्तान की मध्यस्थता से बनी सहमति
जानकारी के अनुसार, इस समझौते को अंतिम रूप देने में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने घोषणा की कि दोनों पक्ष सैन्य गतिविधियों को रोकने और आगे के राजनयिक समाधान की दिशा में सहमत हो गए हैं।

समझौते के प्रमुख बिंदु
प्रारंभिक मसौदे और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार समझौते में निम्न प्रमुख बातें शामिल हैं:
अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल युद्धविराम।
होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोलना।
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करना।
60 दिनों की अस्थायी शांति अवधि, जिसमें आगे की वार्ताएं होंगी।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अलग से बातचीत।
क्षेत्रीय तनाव कम करने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश।

दुनिया की अर्थव्यवस्था को क्यों मिलेगी राहत?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध और नाकेबंदी के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी और कई देशों में ईंधन महंगा हुआ था। समझौते की खबर आते ही ब्रेंट क्रूड के दाम लगभग 4 प्रतिशत तक गिर गए, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखी गई।

अभी भी बाकी हैं कई अहम सवाल
हालांकि युद्ध रोकने पर सहमति बन गई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 60 दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे और इन्हीं वार्ताओं से यह तय होगा कि यह अस्थायी समझौता स्थायी शांति में बदल पाता है या नहीं।

क्या होगा आगे?
19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह के बाद समझौते को औपचारिक रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह खोले जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यदि आगे की बातचीत सफल रहती है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय बाद स्थिरता लौटने की उम्मीद बढ़ेगी।

अमेरिका-ईरान के बीच बनी नई सहमति से वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की राजनीति पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

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