रिपोर्ट-खिलेश साहू
कुरूद विधायक के ग्राम कचना में बिना डिग्री और आवश्यक पंजीयन के संचालित होने के आरोपों से घिरे एडवांस पैथोलॉजी लैब पर प्रकाशित खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारियों को लैब बंद मिली। बताया गया कि दुकान के सामने लगा बैनर हटा दिया गया है और शटर पर ताला लगा हुआ है। अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही लैब से सामान भी हटा लिया गया का आशंका है। निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी ने बताया कि वे केवल निरीक्षण के लिए गए थे, कार्रवाई करने नहीं…? इस बयान के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लैब लगभग तीन वर्षों से संचालित हो रही थी तो विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं थी और अब भी कार्रवाई से परहेज क्यों किया जा रहा है।
लगभग तीन वर्षों से संचालन का दावा, पंजीयन पर सवाल
मामले में आरोप है कि एडवांस पैथोलॉजी लैब पिछले लगभग तीन वर्षों से क्षेत्र में संचालित हो रही थी। लैब संचालक के पास केवल ग्राम पंचायत कचना से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) होने की जानकारी सामने आई है, जबकि जिला चिकित्सा कार्यालय से पंजीयन या अनुमति के दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताए गए हैं।
50प्रतिशत कमीशन का दावा बना चर्चा का विषय…जानकारी के अनुसार लैब संचालक द्वारा आसपास के गांवों से ब्लड सैंपल एकत्रित किए जाते थे। साथ ही डॉक्टरों को जांच रिपोर्ट के एवज में 50प्रतिशत तक कमीशन दिए जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कार्रवाई की मांग तेज…स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।








