कोई तन से अमीर है, तो कोई मन से ग़रीब है,
कोई बातों में धनी है, तो कोई कर्मों में ग़रीब है।
प्रभु की ऐसी लीला है, यहाँ सब कुछ अजीब है,
न जाने कैसी प्रभु की यह अद्भुत तदबीर है॥
कोई सब कुछ लुटा देता, कोई पाई-पाई जोड़ता है,
कोई अपार धन पाता है, कोई जीवन भर तरसता है।
कोई महलों में रहकर भी सुख-चैन नहीं पाता है,
कोई झोपड़ी में रहकर भी हँसता-गाता जाता है॥
कोई इच्छाओं के बोझ तले हर पल दबता जाता है,
कोई थोड़े में संतोष कर जीवन सफल बनाता है।
जिसके पास जो कुछ भी है, उसका अपना नसीब है,
दुनिया का यह रंगमंच भी कितना बड़ा अजीब है॥
ज़िन्दगी में अजब-ग़ज़ब यह उलटफेर चलता है,
जिसे चाहो वह नहीं मिलता, अनचाहा मिल जाता है।
इस दुनिया का हर इक मंज़र कितना बड़ा विचित्र है,
न जाने कैसी प्रभु की यह अनदेखी तदबीर है॥
कोई निर्धन होकर खुश है, कोई धनवान दुखी है,
जिसने जैसा भाग्य पाया, उसकी वैसी ज़िन्दगी है।
धीरज धर और कर्म कर, यही जीवन की जागीर है,
सबकी अपनी तक़दीर है, न जाने कैसी तदबीर है॥
✍️: राजकुमार सोनी, रायपुर (छत्तीसगढ़)







