14 अप्रैल 2026 को वेदांता पावर लिमिटेड, सिंघीतराई, जिला सक्ती में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट में 25 से अधिक श्रमिकों की मृत्यु एवं अनेक श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए। इस अत्यंत गंभीर औद्योगिक दुर्घटना के संबंध में राज्य सरकार एवं प्रशासन द्वारा जारी आदेशों और पत्राचार से जांच प्रक्रिया में गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं, जिन पर तत्काल स्पष्टीकरण आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक ESTB/11647/2026-GAD-6 दिनांक 17.04.2026 के आधार पर आयुक्त, बिलासपुर संभाग द्वारा 20.04.2026 को आदेश जारी कर स्वयं इस दुर्घटना की जांच प्रारंभ की गई तथा विभिन्न विभागों एवं वेदांता प्रबंधन को जांच हेतु उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।
इसके बावजूद, मेरे द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (PG Portal) में दर्ज शिकायत को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कलेक्टर, सक्ती को अग्रेषित किया गया और कलेक्टर कार्यालय ने उसे अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), डभरा को भेज दिया। एसडीएम के 13.07.2026 के पत्र में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि इस दुर्घटना की जांच आयुक्त, बिलासपुर संभाग द्वारा की जा रही है तथा उनके स्तर पर कोई कार्रवाई पूर्ण नहीं हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम से निम्नलिखित गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं—
1. जब छत्तीसगढ़ शासन के आदेश के अनुसार जांच आयुक्त, बिलासपुर संभाग द्वारा की जा रही है, तो मेरी शिकायत सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कलेक्टर, सक्ती को क्यों भेजी गई?
2. कलेक्टर, सक्ती ने उक्त शिकायत को एसडीएम, डभरा को किस अधिकार और उद्देश्य से अग्रेषित किया, जबकि जांच का दायित्व आयुक्त, बिलासपुर को सौंपा जा चुका था?
3. इस दुर्घटना की मजिस्ट्रियल जांच वास्तव में कौन कर रहा है—आयुक्त, बिलासपुर, कलेक्टर, सक्ती या एसडीएम, डभरा? राज्य सरकार इस संबंध में स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करे।
4. आयुक्त, बिलासपुर द्वारा जारी नोटिस के अनुपालन में क्या कारखाना अधिभोगी (Occupier) अनिल अग्रवाल, कारखाना प्रबंधक (Factory Manager) देवेंद्र पटेल तथा वेदांता प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जांच के समक्ष उपस्थित हुए? यदि नहीं, तो उनके विरुद्ध क्या वैधानिक कार्रवाई की गई?
5. इस दुर्घटना के संबंध में दर्ज FIR किस सक्षम प्राधिकारी के निर्देश पर दर्ज की गई तथा FIR दर्ज होने के तीन माह बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
6. घटना के तीन माह बाद भी आयुक्त की जांच रिपोर्ट, कलेक्टर/मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, मुख्य कारखाना निरीक्षक की जांच रिपोर्ट तथा मुख्य बॉयलर निरीक्षक की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
7. यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो रिपोर्ट सार्वजनिक करने में क्या कानूनी बाधा है? और यदि जांच अभी लंबित है, तो इसकी समय-सीमा क्या है?
यह मामला केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन, औद्योगिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय है। मृतक एवं घायल श्रमिकों तथा उनके परिवारों के हित में आवश्यक है कि सभी जांच रिपोर्टें तत्काल सार्वजनिक की जाएं, दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए।
— शशांक दुबे
जिला अध्यक्ष, INTUC, कोरबा
सदस्य, All India Professionals’ Congress (AIPC)







