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ब्रिटिशकालीन स्मारक शक्ति रेल्वे स्टेशन भवन को नष्ट करने के बजाय सजाना@संवारना वक्त की मांग… चितरंजय पटेल

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ब्रिटिश काल में शुरू हुई महत्वपूर्ण रेल्वे लाइन हावड़ा बॉम्बे रूट में स्थापित शक्ति रेल्वे स्टेशन का अपना इतिहास है जहां शक्ति रियासत के मालिक लीलाधर सिंह को आवागमन हेतु रूट की प्रतिष्ठित ट्रेन हावड़ा बांबे मेल स्टेशन में इंतजार करती थी। आज सदियों से स्थापित उसी रेल स्टेशन बिल्डिंग को अकारण विभाग के द्वारा साजिशी ढंग से नष्ट करने की तैयारी चल रही है जबकि इस डेमोलिशन का कोई सार्थक औचित्य ही नहीं है। साथ ही इस भवन की आर्किटेक्ट और मजबूती को देखते हुए आम लोगों के लिए स्मारक के रूप में घोषित कर उसे सजाने_संवारने का निर्णय लिया जाना वक्त की मांग है, क्योंकि आज भारत सरकार अपने प्राचीन धरोहरों के संरक्षण की प्राथमिकता के साथ विकास के रोड मेप तैयार कर रही है तब मात्र 5 डिसमिल भूमि पर खड़ी इस ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ना निश्चित रूप से स्थानीय जनमानस के खिलाफ है।

इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने इस ओर रेल प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुआ कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ने के बजाय इसका सौंदर्यीकरण के साथ इसे सहेजने और संवारने की आवश्यकता है। इसके लिए अंचल के सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के साथ इस तोड़फोड़ के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए इस ब्रिटिशकालीन भवन को स्मारक घोषित कर सजाने संवारने का प्रयास किया जाएगा ताकि हमारी भावी पीढ़ी को शक्ति रेल्वे स्टेशन के समृद्ध इतिहास के ज्ञान के साथ इसे सेल्फी प्वाइंट के रूप में स्थापित किया जा सके जहां अंचल वासी अपने समृद्ध इतिहास पर गर्व करें।

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