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24 दिनों से पुलिस के दरवाजे पर न्याय की दस्तक, कार्रवाई अब भी इंतजार में

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-महतारी सेवा समिति की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक को सौंपा था शिकायत आवेदन, आरोप—कबीर धाम परिसर में गाली-गलौज, धमकी और शराब के नशे में अभद्र व्यवहार से भय का माहौल

-कार्रवाई में देरी से शिकायतकर्ताओं का मनोबल टूटने और आरोपियों के हौसले बढ़ने का दावा, महिलाओं ने मांगी सुरक्षा

जिला जांजगीर-चांपा। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक कार्यों के लिए सक्रिय महतारी सेवा समिति मानिकपुरी समाज की महिलाओं द्वारा गंभीर शिकायत किए जाने के बावजूद करीब लगभग एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने का मामला अब सवालों के घेरे में है। समिति की जिला अध्यक्ष श्रीमती रमशिला मानिकपुरी द्वारा पुलिस अधीक्षक, जिला जांजगीर-चांपा के नाम सौंपे गए आवेदन में बिरगहनी स्थित जनकल्याण मानिकपुरी समाज कबीर धाम परिसर में महिलाओं के साथ कथित रूप से गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार, धमकी तथा शराब के नशे में बाधा उत्पन्न किए जाने की शिकायत की गई है।

आवेदन में समिति की महिलाओं ने बताया है कि लगभग 1.50 एकड़ भूमि समाज के पूर्व संस्थापक श्री परदेशी दास द्वारा संरक्षण एवं विकास के लिए उन्हें सौंपी गई है। इसी परिसर में महतारी सेवा समिति की महिलाएं पौधरोपण, खेती तथा पर्यावरण संरक्षण सहित सामाजिक कार्य करती हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ लोग शराब के नशे में परिसर में आकर महिलाओं के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते हैं और उनके सामाजिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं।

शिकायत गंभीर, लेकिन कार्रवाई का इंतजार

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब महिलाओं ने बाकायदा पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच, एफआईआर, सुरक्षा और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की, तो शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसी घटनाओं के कारण समिति की महिलाओं में भय और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है। महिलाओं का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पुलिस से शिकायत प्राप्त होने के बाद उसकी जांच, तथ्य-सत्यापन और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया होना स्वाभाविक है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में शांति भंग की आशंका वाले मामलों में निवारक कार्रवाई तथा शांति बनाए रखने से संबंधित प्रावधान भी मौजूद हैं।

कार्रवाई में देरी से किसका बढ़ रहा मनोबल?

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि एक महीने तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप स्वयं शिकायतकर्ताओं के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है। समिति से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि जब शिकायत के बाद भी कथित रूप से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती, तो शिकायतकर्ताओं को यह महसूस होने लगता है कि उनकी आवाज शायद जिम्मेदार अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच रही।
यही स्थिति कथित आरोपियों के हौसले बढ़ने की आशंका को जन्म देती है।

समिति की ओर से यह भी चिंता जताई जा रही है कि यदि भविष्य में किसी महिला के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह सवाल केवल एक समिति का नहीं, बल्कि उन तमाम महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा है जो सामाजिक और सार्वजनिक कार्यों में सक्रिय हैं।

सरपंच के पुत्र का नाम शिकायत में—जांच से ही सामने आएगा सच

शिकायतकर्ताओं द्वारा बिरगहनी के सरपंच के पुत्र को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं और उनका कहना है कि कार्रवाई नहीं होने से उसका मनोबल बढ़ा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय पुलिस प्रशासन के लिए जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाए।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुरूप कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो इसकी स्थिति भी शिकायतकर्ताओं के सामने स्पष्ट की जानी चाहिए। यही निष्पक्ष प्रशासन की पहचान है।
महिलाओं का सवाल—सामाजिक कार्य करना अपराध तो नहीं?

महतारी सेवा समिति की महिलाओं का कहना है कि वे कबीर धाम परिसर में सामाजिक, पर्यावरणीय और जनसेवा से जुड़े कार्य कर रही हैं। ऐसे में यदि उन्हें कथित रूप से गाली-गलौज, धमकी या असुरक्षा का सामना करना पड़ता है तो यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं रह जाता, बल्कि महिलाओं के सार्वजनिक एवं सामाजिक जीवन में सुरक्षित भागीदारी का प्रश्न बन जाता है।

कानून में महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े अपराधों के लिए अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 वर्तमान आपराधिक कानून का प्रमुख ढांचा है।

अब पुलिस प्रशासन से उम्मीद
महतारी सेवा समिति की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए, कबीर धाम परिसर में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा दी जाए और भविष्य में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

अब देखना यह है कि एक महीने पुराने इस आवेदन पर पुलिस प्रशासन कब तक जांच आगे बढ़ाता है।
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी शिकायत को लंबित रखना केवल एक आवेदन को लंबित रखना नहीं है। यह उस भरोसे को प्रभावित करता है जो आम नागरिक पुलिस और प्रशासन पर करता है। शिकायत सही है तो कार्रवाई होनी चाहिए और शिकायत गलत है तो निष्पक्ष जांच से सच सामने आना चाहिए—लेकिन मौन और देरी किसी भी स्थिति में समाधान नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर महतारी सेवा समिति की महिलाओं को न्याय और सुरक्षा के लिए और कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा?

महतारी सेवा समिति मानिकपुरी समाज जिला अध्यक्ष श्रीमती रमशिला मानिकपुरी ने बताया कि आज कबीर धाम पर बने भवन में लगा तला सरपंच के पुत्र अपने साथी के साथ पहुंचकर सामुदायिक भवन लेगे ताला को तोड़ दिया इससे अंदाजा लगाया जा सकता की पुलिस की कार्यवाही में देरी के कारण कितना मनोबल बढ़ रहा अगर पुलिस प्रशासन चुपी साधी हुई है।

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