पामगढ़। संयुक्त जन जागरूकता अभियान के तहत वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. चंद्रशेखर खरे तथा प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी जितेंद्र कुमार खरे ने सितंबर माह में किसानों के लिए आवश्यक कृषि कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। उन्होंने किसानों से फसल की स्थिति के अनुसार समय पर कृषि कार्य करने तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करने की अपील की है।
यह किसान सलाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान समाजसेवी स्व. हिंच्छाराम खरे, स्व. गणेशराम खरे तथा महान देहदानी स्व. मनोज कुमार खरे की स्मृति में चलाए जा रहे संयुक्त जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत कृषक जनहित में जारी की गई है।
सितंबर माह के प्रमुख कृषि कार्य
1. धान की जगह वैकल्पिक फसलों की बुवाई करें
यदि किसी कारणवश किसान धान की फसल नहीं लगा पाए हैं, तो खेत की स्थिति एवं उपलब्ध समय के अनुसार कुलथी, रामतिल, उड़द, टोरिया, मक्का, सूरजमुखी, सब्जी एवं चारा फसलों की बुवाई की जा सकती है।
2. धान में तना छेदक कीट की निगरानी करें
धान की फसल में पीला तना छेदक कीट के वयस्क दिखाई देने पर खेत का नियमित निरीक्षण करें। तना छेदक के अंड समूहों को एकत्र कर नष्ट करें। साथ ही डेड हार्ट (सूखी पत्तियों) को खींचकर बाहर निकालें। नियंत्रण के लिए कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4.0 प्रतिशत जी.आर. का 750–1000 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है।
3. धान में झुलसा रोग पर रखें नजर
धान की फसल में झुलसा रोग के लक्षण नाव के आकार के धब्बों के रूप में दिखाई देने पर ट्राइसाइक्लाजोल 0.6 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
4. खरपतवार नियंत्रण और नत्रजन का उपयोग
उच्चहन धान के खेतों को खरपतवार मुक्त रखें। बारिश होने के बाद फसल की आवश्यकता एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार नत्रजन उर्वरक का उपयोग करें।
5. फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें
धान में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप 2 नग प्रति एकड़ की दर से खेत में लगाएं। इससे कीट की उपस्थिति एवं प्रकोप की निगरानी में सहायता मिलेगी।
6. जीवाणु जनित झुलसा रोग में सावधानी
धान में जीवाणु जनित झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देने पर, यदि पानी की उपलब्धता हो तो खेत से पानी निकालकर 3–4 दिन तक खेत को खुला रखें। साथ ही 25 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है।
7. अदरक और हल्दी में मिट्टी चढ़ाएं
अदरक एवं हल्दी की फसलों में हल्की मिट्टी चढ़ाकर पलवार करें। इससे फसल की जड़ों के विकास एवं नमी संरक्षण में मदद मिलती है।
8. आम के बगीचों में रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई
आम के फलों की तुड़ाई समाप्त होने के बाद रोगग्रस्त शाखाओं की हल्की छंटाई करें, ताकि बगीचे में रोगों के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।
9. शिमला मिर्च की रोपाई करें
सितंबर माह में उपयुक्त परिस्थितियों के अनुसार शिमला मिर्च की रोपाई का कार्य किया जा सकता है।
10. खरीफ प्याज की रोपाई
किसान खरीफ प्याज की रोपाई खेतों में समय पर करें और फसल की प्रारंभिक अवस्था से ही उचित देखभाल करें।
11. रबी फसलों के बीज की व्यवस्था अभी से करें
रबी फसलों की आगामी बुवाई को ध्यान में रखते हुए किसान अभी से गुणवत्तापूर्ण एवं अनुशंसित बीज की व्यवस्था कर लें, ताकि बुवाई के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो।
12. शरद ऋतु के एक वर्षीय पौधों के लिए नर्सरी तैयार करें
शरद ऋतु में लगाए जाने वाले एक वर्षीय पौधों के लिए नर्सरी तैयार करने का कार्य समय रहते शुरू करें।
13. आम के बगीचों में मिली बग के नियंत्रण के लिए जुताई
आम के बगीचों में मिली बग के नियंत्रण के लिए पेड़ों के आसपास तथा बगीचे में उचित जुताई करें। इससे कीट के जीवन चक्र को प्रभावित करने में मदद मिल सकती है।
14. कृषि उपयोगी मोबाइल एप का लाभ उठाएं
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए क्रॉप डॉक्टर, राइस आईएफसी एवं हर्बकेल-हर्बिसाइड कैलकुलेटर जैसे कृषि उपयोगी मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर कृषि संबंधी जानकारी का लाभ लेने की सलाह दी गई है।
किसानों से नियमित फसल निरीक्षण की अपील
कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे ने कहा कि सितंबर माह में खरीफ फसलों में कीट एवं रोगों की समस्या पर विशेष निगरानी जरूरी है। किसान खेतों का नियमित निरीक्षण करें और किसी भी कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय पर उचित उपाय अपनाएं। कृषि संबंधी किसी भी समस्या के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें।
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि समय पर निगरानी, उचित कृषि प्रबंधन और वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर फसल उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
किसान जनहित एवं समाजहित में इस सलाह का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने की अपील की गई है।
‘कृषि जीवनस्य आधारम्’ यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब, लाइक, कमेंट एवं शेयर करने की भी अपील की गई है।
शुभेच्छु एवं मार्गदर्शक:
डॉ. चंद्रशेखर खरे, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं प्रक्षेत्र प्रबंधक, शोध विद्वान, सस्य विज्ञान, कृषि विज्ञान केंद्र, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर; कृषक वैज्ञानिक सलाहकार एवं करियर मार्गदर्शक, संयुक्त जन जागरूकता अभियान, पामगढ़।
जितेंद्र कुमार खरे, प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी
धर्मेन्द्र कुमार खरे, निदेशक एवं प्रमुख, संयुक्त जन जागरूकता अभियान, पामगढ़
सुमन खरे, वरिष्ठ समाज सेविका, पामगढ़
संपर्क: 8770414150, 6264388869
अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।







