बिलासपुर संवाददाता – रेशमा लहरे
जर्जर सड़कों, अधूरे निर्माण और डामर की बढ़ती कीमतों पर घेरा; कहा—जनता को आश्वासन नहीं, काम पूरा होने की समयसीमा चाहिए
बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डामर की बढ़ती कीमतों के कारण ठेकेदारों को राहत देने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन सड़क निर्माण और मरम्मत में आ रही बाधाओं का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते? गड्ढों से भरी सड़कें, उड़ती धूल और अधूरे निर्माण कार्यों से परेशान लोगों को अब ठोस कार्रवाई और राहत की जरूरत है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने 31 मई 2026 को जारी आदेश के तहत डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए पात्र अनुबंधित कार्यों के लिए अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था की है। यह व्यवस्था निर्धारित शर्तों के अधीन 1 अप्रैल से 30 जून 2026 की अवधि के लिए लागू की गई थी। इसका उद्देश्य बढ़ी हुई निर्माण लागत के कारण सड़क निर्माण, नवीनीकरण और रखरखाव के कार्यों को प्रभावित होने से बचाना है।
कई प्रमुख सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाया
अंकित गौरहा पूर्व में भी बेलतरा क्षेत्र की विभिन्न सड़कों की जर्जर स्थिति को लेकर आवाज उठा चुके हैं। इनमें मंगला चौक से दीनदयाल कॉलोनी, अशोक नगर से बिरकोना, चांटीडीह चौक से डीएलएस कॉलेज मार्ग, सेंदरी से मोपका बायपास, राजकिशोर नगर चौक से छठघाट और साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी मार्ग प्रमुख हैं।
इन मार्गों की स्थिति को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन सड़कों के निर्माण और मरम्मत को स्वीकृति मिल चुकी है, किन कार्यों पर काम चल रहा है और कौन-से कार्य अब भी लंबित हैं। खराब सड़कों के कारण लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी होती है। वहीं, धूल और गड्ढों से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
पीडब्ल्यूडी को राहत, नगर निगम के ठेकों पर निर्णय कब?
डामर की कीमतों में वृद्धि के चलते लोक निर्माण विभाग के पात्र ठेकों के लिए अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था किए जाने के बाद नगर निगम के सड़क निर्माण कार्यों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। गौरहा का कहना है कि नगर निगम के ठेकेदार भी बढ़ी हुई लागत के कारण राहत की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने संबंधित विभागों से इस मामले में स्पष्टता लाने की मांग की, ताकि लागत और भुगतान से जुड़े विवादों के कारण सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हों। हालांकि, नगर निगम के अनुबंधों पर किसी राहत व्यवस्था की लागू स्थिति संबंधित नियमों और आदेशों के आधार पर स्पष्ट होना जरूरी है।
विवाद सरकार और ठेकेदारों के बीच, परेशानी जनता को क्यों?
गौरहा ने कहा कि निर्माण लागत, भुगतान और अनुबंध की शर्तों को लेकर सरकार और ठेकेदारों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसका असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए। लोगों को इस बात से मतलब है कि सड़क कब बनेगी, गड्ढों से कब राहत मिलेगी और सुरक्षित आवागमन कब सुनिश्चित होगा।
उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग लंबित सड़क निर्माण कार्यों की सूची, स्वीकृत राशि, भुगतान की स्थिति और कार्य पूरा करने की समयसीमा सार्वजनिक करें। साथ ही, नगर निगम के ठेकों में बढ़ी लागत को लेकर उठ रही मांगों पर भी स्पष्ट निर्णय लिया जाए, जिससे विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहे।
जनता को आश्वासन नहीं, काम की समयसीमा चाहिए
अंकित गौरहा ने कहा कि सड़क निर्माण की बाधाओं को दूर करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि बढ़ी हुई लागत के कारण काम प्रभावित हो रहा है, तो संबंधित विभागों को नियमों के अनुरूप समाधान निकालना चाहिए। केवल आदेश और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार और ठेकेदारों के बीच भुगतान एवं बढ़ी हुई लागत का समाधान कब होगा और बेलतरा की बदहाल सड़कों से जूझ रही जनता को राहत कब मिलेगी?
गौरहा के मुताबिक, जनता को अब आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों को पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा चाहिए। सड़कें सुधरें, निर्माण कार्य समय पर पूरे हों और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिले—यही विकास कार्यों की वास्तविक कसौटी है।







