रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस नए कानून के तहत बलपूर्वक, प्रलोभन या धोखाधड़ी से किए जाने वाले सामूहिक मतांतरण के दोषियों को अब आजीवन कारावास तक की सजा भुगतनी होगी।
विशेष रूप से महिलाओं, नाबालिगों, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के साथ होने वाले अवैध मतांतरण मामलों में 20 वर्ष तक की कैद का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, डिजिटल माध्यमों से दिए जाने वाले प्रलोभन को भी अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। इस कानून के तहत सभी ऐसे अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।
सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य में अवैध मतांतरण की बढ़ती घटनाओं को रोकने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था। विधेयक के पारित होने से अब अवैध धर्मांतरण और प्रलोभन के मामलों पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई संभव होगी।







