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मानवता और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल : भालू हमले की पीड़िता प्रेमबाई के घर पहुंचेगा जिला मेडिकल बोर्ड

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संवाददाता – हनुमान प्रसाद यादव
डॉ. अविनाश खरे ने दिखाई मानवीय संवेदना, दिव्यांग महिला को अब नहीं लगाने पड़ेंगे अस्पताल के चक्कर
गरीब और असहाय महिला की पीड़ा समझ प्रशासन खुद पहुंचा मदद के लिए, ग्रामीणों ने कहा – “यही है जनसेवा का असली स्वरूप”
एमसीबी/ जिले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशीलता, मानवता और जनसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने आम लोगों के मन में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत कर दिया है। ग्राम चिडोला की रहने वाली प्रेमबाई गोंड, जो पिछले वर्ष भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, उनकी पीड़ा को समझते हुए जिला प्रशासन ने ऐसा मानवीय कदम उठाया हैै।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने मामले का संज्ञान लेते हुए निर्णय लिया कि अब पीड़ित महिला को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पतालों और दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बल्कि जिला मेडिकल बोर्ड स्वयं उनके घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण करेगा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेगा। यह कदम प्रशासन के संवेदनशील और मानवीय चेहरे को सामने लाने वाला माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार ग्राम चिडोला निवासी प्रेमबाई गोंड पर 20 जून 2025 को भालू ने हमला कर दिया था। इस दर्दनाक घटना में उनकी एक आंख बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। घटना के बाद से उनका जीवन संघर्षों से घिर गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने और शारीरिक परेशानी के कारण उनके लिए बार-बार मनेंद्रगढ़ आना-जाना संभव नहीं था। वन विभाग से मिलने वाली बीमा सहायता और अन्य शासकीय लाभ प्राप्त करने के लिए उन्हें दिव्यांग प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी, लेकिन परिस्थितियां उनके लिए बड़ी बाधा बनी हुई थीं।
जब यह जानकारी डॉ. अविनाश खरे तक पहुंची तो उन्होंने इसे केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक पीड़ित महिला की वास्तविक परेशानी के रूप में देखा। उन्होंने बिना देर किए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि मानवता को सर्वाेपरि रखते हुए महिला को राहत पहुंचाई जाए। इसके बाद निर्णय लिया गया कि जिला मेडिकल बोर्ड की टीम स्वयं गांव पहुंचकर जांच करेगी।
बुधवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम ग्राम चिडोला पहुंचकर प्रेमबाई गोंड का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। मौके पर ही आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करते हुए नियमानुसार दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई भी की जाएगी। इससे पीड़िता को राहत मिलने के साथ-साथ शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का मार्ग भी आसान हो जाएगा। प्रशासन के इस निर्णय ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में भावनात्मक असर छोड़ा है। ग्रामीणों और परिजनों ने कहा कि आज के समय में जब गरीब और जरूरतमंद लोग छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भटकते रहते हैं, ऐसे में प्रशासन का स्वयं घर तक पहुंचना वास्तव में मानवता और जनसेवा की मिसाल है। ग्रामीणों ने डॉ. अविनाश खरे और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम साबित करता है कि शासन केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि आम लोगों के दुख-दर्द में सहभागी बनने के लिए भी तत्पर है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जरूरतमंद, असहाय और विशेष परिस्थितियों में रहे लोगों तक सेवाएं पहुंचाना शासन की प्राथमिकता है। प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक संवेदनशीलता के साथ सहायता पहुंचाना है। प्रेमबाई गोंड के लिए उठाया गया यह मानवीय कदम प्रशासनिक संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवता की सच्ची भावना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। यह घटना यह संदेश देती है कि जब शासन संवेदनशीलता के साथ कार्य करता है, तब प्रशासन केवल व्यवस्था नहीं बल्कि लोगों के जीवन में भरोसे और सहारे का माध्यम बन जाता है।

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