पूरे गांव को दिया एकता, प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश, ग्रामीणों ने जताया आभार
जिला संवाददाता डुगेश्वर संजू साहू
भवानीपुर (पलारी)। ग्रामीण संस्कृति की असली पहचान आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता में निहित होती है। इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए ग्राम गोड़ा में एक भव्य ग्रामीण न्यौता भोज का आयोजन किया गया। यह आत्मीय एवं सराहनीय पहल ग्राम की प्रतिष्ठित बुजुर्ग माता श्रीमती केजहारिन (लूटी) घृतलहरे, पति स्वर्गीय सरजू प्रसाद घृतलहरे द्वारा की गई, जिसने पूरे गांव को स्नेह और भाईचारे के एक सूत्र में बांध दिया।
आयोजित ग्रामीण न्यौता भोज में गांव के सभी लोगों को आदर एवं सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान घृतलहरे परिवार द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया गया। ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए एक साथ बैठकर भोजन प्रसादी ग्रहण की और आपसी प्रेम एवं आत्मीयता का परिचय दिया।
इस अवसर पर गांव के बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं एवं बच्चों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। पूरे आयोजन में सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों और ग्रामीण संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में इस प्रकार के ग्रामीण न्यौता भोज न केवल सामाजिक रिश्तों को मजबूती प्रदान करते हैं, बल्कि आपसी मनमुटाव को दूर कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव का वातावरण भी निर्मित करते हैं। श्रीमती केजहारिन घृतलहरे की यह पहल ग्रामीण संस्कृति और मानवीय मूल्यों को संरक्षित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों, प्रबुद्धजनों, माताओं-बहनों एवं युवाओं ने श्रीमती केजहारिन घृतलहरे एवं उनके पूरे परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। ग्राम गोड़ा का यह ग्रामीण न्यौता भोज आपसी प्रेम, सम्मान और सामाजिक एकता के एक यादगार अध्याय के रूप में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।








