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पाली में बिजली के “नाच- नखरे” जारी…! गर्मी- बारिश पूर्व मेंटनेंस के नाम पर घंटों कटौती फिर भी बिजली गुल, ग्रामीण इलाकों में स्थिति दयनीय, 33केवी फाल्ट बना बहाना

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-पेयजल, व्यवसाय सब चौपट, उपभोक्ताओं में आक्रोश.

रवि चौहान/कोरबा/पाली:- विद्युत स्टेशन पाली के अंतर्गत नगर सहित ग्रामीण अंचल में बिजली उपभोक्ता इन दिनों अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। 33केवी लाइन फाल्ट के नाम पर रोजाना घंटों बिजली गुल हो रही है। विभागीय लचर व्यवस्था से आमजन त्रस्त है और बिजली विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

देखा जाए तो साल भर समस्या, समाधान जीरो की तर्ज पर पाली में बिजली की समस्या न गर्मी में कम हुई, न बरसात में। गर्मी पूर्व मेंटनेंस के नाम पर घंटों कटौती की गई। बावजूद इसके पूरी गर्मी बिजली के आंख- मिचौली, अघोषित कटौती और लो वोल्टेज से लोग परेशान रहे। वहीं बारिश पूर्व ट्री कटिंग के नाम पर फिर बिजली बंद रखी गई। लेकिन ऐन बरसात के मौसम में भी बिजली की मनमानी जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति सबसे खराब है। एक बार बिजली गई तो कब आएगी कोई गारंटी नही। ऐसे में कई- कई दिनों तक गांवों में बिजली के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं। बिजली बंद होने की कोई समय सीमा तय नही है।

हल्की बारिश- आंधी या आकाशीय बिजली चमकने पर बिजली बंद होना तो जैसे जन्मजात समस्या बन गई है। लेकिन बिना किसी मौसम के कभी भी बिजली बंद होना समझ से परे है। इस संबंध पर जब भी अधिकारी- कर्मचारियों से पूछा जाता है तो उनका एक ही रटा- रटाया जवाब मिलता है- “33केवी छुरी से चैतमा या चैतमा से पाली कके बीच फाल्ट है, सुधार कार्य चल रहा है।” वहीं मोपका लाइन में भी बेलतरा सप्लाई फाल्ट बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। सुबह बिजली गई तो बोर- सबमर्सिबल नही चलने से पेयजल की किल्लत, दोपहर में बंद हुई तो उमस और शाम ढलने के बाद अंधेरे में गुल होने पर जमीन पे रेंगने वाले विषैले जीव- जंतुओं का खतरा रहता है। साथ ही असमय विद्युत बंद से बिजली आधारित दुकानें- वेल्डिंग, आटा चक्की, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे व्यवसायों को भारी नुकसान होता है, अन्य व्यवसाय भी प्रभावित होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत विभाग “जब सिर पर ओले पड़े तब छत ढूंढने लगे” वाली तर्ज पर काम कर रहा है। यदि ज्यादातर फाल्ट 33केवी लाइन में ही आ रहा है तो स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम क्यों नही उठाए जा रहे? लाइन अपग्रेड, नया फीडर या वैकल्पिक व्यवस्था पर कोई काम नही दिख रहा।

उपभोक्ताओं का कहना है कि बिल तो भारी- भरकम लेते हैं, फिर सुविधा के नाम पर अंधेरा क्यों देते हैं। अब यह समस्या लोगों के बर्दाश्त से बाहर हो गया और उनमें आक्रोश इस कदर पनपने लगा है कि किसी दिन गुस्सा ज्वालामुखी के लावा की तरह फट पड़ा तो इसका खामियाजा विद्युत विभाग को भुगतना पड़ सकता है। पाली की लचर बिजली व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं का सवाल है कि 33केवी लाइन के स्थायी सुधार के लिए टास्क फोर्स क्यों नही बनाई जाती? बार- बार फाल्ट वाले क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक फीडर की व्यवस्था क्यों नही हो रही? खाली मेंटनेंस के नाम पर लूट और फाल्ट के नाम पर धोखा, आखिर आम उपभोक्ता कब तक अंधेरे में रहेंगे।

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